नाज़ा: असली कहानी
तेल अवीव की छतों पर रात में फ़िल्माई गई यह इज़राइली डॉक्यूमेंट्री ग़ज़ा युद्ध पर इंटरव्यू पेश करती है।
छतें। रात। कमांडर, जैसा उन्होंने जिया, वैसा ही बताते हुए।
आईडीएफ़ के वरिष्ठ कमांडर और ख़ुफ़िया अफ़सर, यानी वे लोग जिन्होंने ऑपरेशनों का नेतृत्व किया, तेल अवीव की छतों पर बैठकर ग़ज़ा युद्ध के बारे में बताते हैं: आम कपड़ों में लड़ाके, घरों में रखे गए बंधक, सहायता के ट्रक, और गोली चलाने के नियम।
यह उनका बयान है, उनके अपने शब्दों में। फ़िल्म देखें, फिर ख़ुद तय करें कि आप क्या सोचते हैं।
फ़िल्म में आप क्या सुनेंगे
- बच्चे के पालने के नीचे क्या था? अफ़सर बच्चों के एक कमरे के बारे में बताते हैं, जिसके पालने के नीचे सुरंग का शाफ़्ट था।
- आतंकवादी और आम नागरिक में फ़र्क़ कैसे करें? आम कपड़ों में लड़ाके, और ख़ाली घरों में छोड़ी गई वर्दियाँ।
- एक आदमी बच्चे का हाथ पकड़े पास आता है। अब क्या? एक चेकपॉइंट पर लिया गया फ़ैसला, उन सैनिकों की ज़ुबानी जिन्हें वह फ़ैसला लेना पड़ा।
- सहायता के ट्रक आख़िर कहाँ पहुँचे? कमांडरों का कहना है कि काफ़िलों पर बंदूक़ के ज़ोर पर क़ब्ज़ा कर लिया गया। वे बताते हैं कि उन्होंने क्या देखा।
- गोली चलाने का फ़ैसला कौन करता है? मंज़ूरियाँ, वकील, और एक नियम: अगर शक हो, तो गोली नहीं चलाई जाती।
- क्या बंधकों तक दवाइयाँ कभी पहुँचीं? एक सटीक सूची के मुताबिक़ भेजी गईं। अफ़सरों का कहना है कि किसी भी बंधक ने उन्हें मिलने की बात नहीं कही।