# NAZA का खंडन

_हमारी टीम का विश्लेषण, अक्टूबर 2026_

द गार्जियन के साथ जारी हुई युवाल अब्राहम और रेचल स्ज़ोर की 2026 की फ़िल्म NAZA खुद को एक वृत्तचित्र के रूप में पेश करती है। यह दर्शकों को प्रभावित करने के उद्देश्य से बनाई गई फ़िल्म है। इसकी भाषा, साक्षात्कार और संपादन दृश्य-दर-दृश्य दर्शक को पहले से तय एक ही निष्कर्ष तक ले जाते हैं: इज़राइल जनसंहार कर रहा है।

इस पृष्ठ पर हम पहले दिखाते हैं कि अंग्रेज़ी उपशीर्षक सैनिकों की बातों को कैसे बदलते हैं। फिर बताते हैं कि इज़राइली रक्षा बलों (IDF) ने क्या जवाब दिया और पत्रकारों, आलोचकों तथा अधिकारियों को क्या मिला। अंत में चालीस से अधिक दृश्यों का अपना विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। हर दृश्य में इस्तेमाल की गई प्रभाव डालने की तकनीक को न्यूरो-लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग (NLP) की शब्दावली में नाम दिया गया है। फ़िल्म के उद्धरण हिब्रू से अनूदित हैं।

## उपशीर्षक क्या बदलते हैं

NAZA के अधिकांश दर्शक हिब्रू नहीं जानते। सैनिकों ने क्या कहा, यह उन्हें केवल अंग्रेज़ी उपशीर्षकों से पता चलता है। कई जगह उपशीर्षक सैनिक की कही बात से आगे बढ़ जाते हैं: कोई शब्द जोड़ दिया जाता है, अनिश्चितता जताने वाला शब्द हटा दिया जाता है और अस्पष्ट टिप्पणी को पक्के दावे में बदल दिया जाता है। यहाँ किसी व्याख्या की ज़रूरत नहीं। बोली गई बात और पर्दे पर लिखे शब्द साथ रखकर देखें तो वे मेल नहीं खाते।

- **हिब्रू में कही गई बात:** “लगता है कि यही करना ज़रूरी है।”
  **अंग्रेज़ी उपशीर्षक:** The sense in Israeli society is that that’s what we should do.
  सैनिक सिर्फ़ अपनी भावना की बात करता है। उपशीर्षक उस भावना को पूरे इज़राइली समाज की बना देता है, और विदेश में बैठा दर्शक समझता है कि पूरा देश ऐसा चाहता है। (फ़िल्म में हमारी टीम को मिला)
- **हिब्रू में कही गई बात:** “अहमद और उसका पूरा परिवार।”
  **अंग्रेज़ी उपशीर्षक:** Ahmed and his family will die.
  अपनी स्क्रीन पर एक अपार्टमेंट की ओर इशारा करते हुए सैनिक बताता है कि वहाँ कौन रहता है। उपशीर्षक जोड़ देता है कि वे मर जाएँगे। ([The Times of Israel](https://www.timesofisrael.com/nazas-claims-about-idf-conduct-in-gaza-are-grave-so-are-the-films-journalistic-flaws/), 2026-09-27)
- **हिब्रू में कही गई बात:** “एक व्यक्ति के लिए, मतलब, 500 तक की मंज़ूरी थी।”
  **अंग्रेज़ी उपशीर्षक:** There was approval once to kill 500 for one human target.
  सैनिक अपनी बात में अनिश्चितता जताता है और कभी “मारने” का शब्द नहीं कहता। उपशीर्षक अनिश्चितता हटा देता है और मारने की बात जोड़ देता है। फ़िल्म ने यही दावा अपने ट्रेलर में रखा। ([The Times of Israel](https://www.timesofisrael.com/nazas-claims-about-idf-conduct-in-gaza-are-grave-so-are-the-films-journalistic-flaws/), 2026-09-27)

हिब्रू न जानने वाला दर्शक यह अंतर पकड़ नहीं सकता। विदेशों में दर्शकों तक फ़िल्म की सबसे कठोर बातें उन शब्दों में पहुँचती हैं जो सैनिकों ने कहे ही नहीं।

## आईडीएफ ने क्या कहा

आईडीएफ ने फ़िल्म पर कई बार प्रतिक्रिया दी: पहले वेनिस में इसके प्रीमियर पर, फिर इसके ट्रेलर में किए गए दावे पर और अंत में दस पन्नों के लिखित जवाब में। फ़िल्म निर्माताओं ने रिलीज़ से पहले अपने आरोप आईडीएफ के सामने नहीं रखे थे और माँगे जाने पर भी उसे फ़िल्म की प्रति नहीं दी। बयान प्रकाशित रूप में उद्धृत किए गए हैं।

> आईडीएफ इस फ़िल्म में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह ख़ारिज करता है। फ़िल्म ऐसे व्यक्तियों की गुमनाम गवाहियों पर निर्भर है जिनकी पहचान की पुष्टि नहीं की जा सकती। यह भी सत्यापित नहीं किया जा सकता कि उन्होंने आईडीएफ में सेवा की थी या नहीं, किस भूमिका में सेवा की थी, या जिन मामलों के बारे में आरोप लगाए जा रहे हैं उनमें वे शामिल थे या नहीं।
>
> इज़राइली रक्षा बल की प्रवक्ता इकाई, [X · Israel Defense Forces](https://x.com/IDF/status/2098399911750389869), 2026-09-11

> यह पूरी तरह झूठ है। आईडीएफ ने ग़ज़ा में कभी ऐसे हमले की योजना नहीं बनाई, उसे मंज़ूरी नहीं दी या उसे अंजाम नहीं दिया जिसमें 500 नागरिकों या उस संख्या के आसपास भी लोगों के मारे जाने की आशंका रही हो। पूरे युद्ध के दौरान ऐसा कोई विश्वसनीय दावा भी सामने नहीं आया कि आईडीएफ के किसी हमले में उस संख्या के आसपास भी लोग मारे गए हों। फ़िल्म निर्माता इस दावे की पुष्टि कर ही नहीं सकते थे, इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है, फिर भी उन्होंने इसे प्रकाशित कर दिया।
>
> इज़राइली रक्षा बल की प्रवक्ता इकाई, 500 नागरिकों के दावे पर, [X · Israel Defense Forces](https://x.com/IDF/status/2099241925848994269), 2026-09-13

> प्रचार सामग्री में किए गए दावे ग़लत हैं। उनमें से कुछ को विकृत और भ्रामक ढंग से पेश किया गया है, जिनका ज़मीनी हक़ीक़त से कोई संबंध नहीं है। भ्रामक चित्रण के बजाय ठोस, पेशेवर और तथ्यों पर आधारित चर्चा संभव बनाने के लिए मैं फ़िल्म निर्माताओं को आमंत्रित करता हूँ कि वे आईडीएफ के प्रतिनिधियों को पूरी फ़िल्म देखने दें, ताकि हम उसमें लगाए गए हर आरोप पर उसके तथ्यों के आधार पर जवाब दे सकें।
>
> ब्रिगेडियर जनरल एफ़ी डेफ़्रिन, आईडीएफ प्रवक्ता, [Jewish News](https://www.jewishnews.co.uk/new-documentary-about-idf-strikes-in-gaza-causes-anger-in-israel/), 2026-09-15

> उद्धृत अंशों में राष्ट्रीय और सैन्य रणनीति के बारे में ऐसे दावे हैं जिनकी जानकारी निचले पदों के सैनिकों को स्पष्ट रूप से नहीं हो सकती। आईडीएफ में हमलों के लक्ष्यों के चयन और उन्हें मंज़ूरी देने के फ़ैसले आईडीएफ के दिशानिर्देशों के अनुसार केवल मनुष्य लेते हैं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता नहीं।
>
> इज़राइली रक्षा बल की प्रवक्ता इकाई, [Ynet](https://www.ynet.co.il/news/article/bkapplrtzx), 2026-09-14

> अब तक जो प्रकाशित हुआ है, उसके आधार पर यह आईडीएफ की आलोचना करने वाली फ़िल्म नहीं है, न ही सच स्थापित करने की कोशिश है। यह ख़ून के झूठे आरोपों, वास्तविकता को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश करने और आईडीएफ के सैनिकों तथा कमांडरों के ख़िलाफ़ गंभीर, झूठे इल्ज़ामों पर आधारित है।
>
> लेफ़्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर, आईडीएफ के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़, [Al-Monitor](https://www.al-monitor.com/originals/2026/09/netanyahu-says-gaza-documentary-naza-shocking-incitement), 2026-09-14

> फ़िल्म “NAZA” आईडीएफ की लक्ष्य निर्धारित करने और हमले करने की प्रक्रिया की विकृत, भ्रामक और बेईमान तस्वीर पेश करती है। फ़िल्म की कहानी वास्तविकता को ग़लत और हेरफेर भरे ढंग से पेश करने से पैदा हुई गंभीर तथ्यात्मक ग़लतियों पर आधारित है।
>
> इज़राइली रक्षा बल की प्रवक्ता इकाई, लिखित जवाब, [IDF Spokesperson's Unit](https://cdn-media.web-view.net/i/ww3xwccasc/________________________16.pdf), 2026-10-01

### आईडीएफ का लिखित जवाब: हर दावे पर

1 अक्टूबर 2026 को आईडीएफ ने दस पन्नों का जवाब प्रकाशित किया। उसके अनुसार, फ़िल्म में गुमनाम लोगों के बयान हैं, जो अधिकतर कई चरणों वाली प्रक्रिया के सीमित, शुरुआती चरण के अपने अनुभव बताते हैं। फ़िल्म युद्ध को समझने के लिए ज़रूरी संदर्भ छोड़ देती है और भ्रामक संपादन तथा ऐतिहासिक अत्याचारों की ओर संकेत करके तथ्यों को और तोड़-मरोड़कर पेश करती है।

जवाब की शुरुआत फ़िल्म के नाम से होती है। NAZA हिब्रू शब्द ‘नेज़ेक अगावी’ का संक्षिप्त रूप है, जिसका अर्थ है सैन्य कार्रवाई में होने वाली अप्रत्यक्ष क्षति। यह शब्द क़ानून का पालन करने वाली हर सेना इस्तेमाल करती है। “विडंबना यह है कि हमलों में ऐसी क्षति का अनुमान लगाने के लिए आईडीएफ जो असाधारण मेहनत और बारीकी बरतता है, फ़िल्म उसे नागरिकों के जीवन के प्रति उदासीनता के सबूत के रूप में पेश करती है। वास्तव में, हमलों से नागरिकों को संभावित क्षति का आकलन अंतरराष्ट्रीय क़ानून की माँग है।” कमांडर इसी आकलन के आधार पर तय करते हैं कि हमला क़ानूनी है या नहीं, अतिरिक्त सावधानियाँ बरतनी हैं, योजना बदलनी है या हमला रद्द करना है।

#### फ़िल्म बनाने के तरीके में तीन खामियाँ

- **गवाह अपने ज्ञान के दायरे से बाहर बोलते हैं.** साक्षात्कार देने वालों को ख़ुफ़िया विभाग का कर्मचारी बताया गया है। उनके बयान ख़ुफ़िया जानकारी जुटाने के शुरुआती चरणों के बारे में हैं, हमलों की योजना और मंज़ूरी के बारे में नहीं। वे ज़िम्मेदारियाँ अभियान चलाने वाली इकाइयों की हैं। किसी लक्ष्य के पास मौजूद नागरिकों का शुरुआती अनुमान वह अंतिम अनुमान नहीं होता जिसके आधार पर हमला किया गया था। लक्ष्य के किसी एक हिस्से को निशाना बनाने, हथियार या समय बदलने और चेतावनी के बाद लोगों के वहाँ से निकलने से यह संख्या काफ़ी बदल सकती है। पेशेवर रूप से स्वतंत्र क़ानूनी सलाहकार हमलों की समीक्षा करते हैं। युद्ध के दौरान नागरिकों को संभावित क्षति के कारण कमांडरों ने हमलों पर पाबंदियाँ लगाईं, योजनाएँ बदलीं, उन्हें दोबारा विचार के लिए लौटाया या मंज़ूरी देने से इनकार किया।
- **दावों की पुष्टि नहीं.** गुमनाम बयानों के अलावा फ़िल्म कोई निर्देश, रिकॉर्ड या पुष्टि करने वाला अन्य सबूत नहीं देती। किसी कथित हमले का लक्ष्य, तारीख़, जगह या हताहतों की संख्या नहीं बताई गई है, इसलिए दर्शक उसकी जाँच नहीं कर सकते। स्वीकृत पत्रकारिता पद्धति के विपरीत, फ़िल्मकारों ने प्रकाशन से पहले अपने आरोप आईडीएफ को जवाब के लिए नहीं भेजे।
- **छोड़ा गया संदर्भ.** फ़िल्म 7 अक्टूबर के नरसंहार को पर्याप्त महत्व नहीं देती, जो हमास से पैदा हुए ख़तरे और इज़राइल के युद्ध में उतरने की वजह समझाता है। वह इस बात को भी पर्याप्त महत्व नहीं देती कि हमास ने अपने आतंकवादियों, हथियारों और ढाँचे को अस्पतालों, संयुक्त राष्ट्र के परिसरों, स्कूलों और मस्जिदों के भीतर और नीचे रखा तथा नागरिक कपड़ों में लड़ाई लड़ी। नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों को भी कम महत्व मिलता है: रद्द किए गए हमले; चेतावनियाँ जारी करने और नागरिकों की मौजूदगी पर नज़र रखने वाला नागरिक क्षति न्यूनीकरण प्रकोष्ठ; स्वतंत्र क़ानूनी सलाहकार; और अक्टूबर 2023 से ग़ज़ा पहुँचाया गया 3.9 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक भोजन।

#### फ़िल्म के दावे और आईडीएफ के जवाब

- **फ़िल्म:** एक हमले में 500 नागरिकों के मारे जाने की मंज़ूरी दी गई थी।
  **आईडीएफ:** आईडीएफ ने ग़ज़ा में कभी ऐसे हमले की योजना नहीं बनाई, मंज़ूरी नहीं दी और न ही उसे अंजाम दिया, जिसमें 500 नागरिकों या उसके आसपास की संख्या में नागरिकों के मारे जाने की आशंका हो। किसी ने भी गंभीरता से यह आरोप नहीं लगाया कि किसी हमले में इसके आसपास की संख्या में नागरिक मारे गए। फ़िल्मकारों ने यह दावा ट्रेलर में रखा, जबकि वे इसकी पुष्टि नहीं कर सकते थे।
- **फ़िल्म:** निचले स्तर के आतंकवादियों पर हमले में 20 तक और वरिष्ठ कमांडरों पर हमले में 200 तक नागरिकों के मारे जाने की आशंका स्वीकार की जा सकती थी।
  **आईडीएफ:** यह दावा मंज़ूरी देने के अधिकार की सीमा को हमला करने की अनुमति समझ लेता है और एक डेटाबेस को लक्ष्यों की सूची मान लेता है। सीमा केवल यह तय करती है कि हमले को मंज़ूरी कौन दे सकता है; यह मौतों की स्वीकार्य संख्या नहीं है। हर कमांडर को फिर भी हर हमले की अनुपातिकता पर विचार करना होता है। निश्चित संख्याओं से ऊपर उच्च स्तर की मंज़ूरी अनिवार्य करना पश्चिमी सेनाओं में सामान्य प्रक्रिया है। 200 की कोई सीमा कभी थी ही नहीं।
- **फ़िल्म:** Lavender मारे जाने वाले लोगों की सूची है।
  **आईडीएफ:** Lavender एक डेटाबेस है जो विभिन्न ख़ुफ़िया स्रोतों का मिलान करके आतंकवादियों के बारे में जानकारी अद्यतन रखता है। किसी व्यक्ति का इसमें नाम होने से वह निशाना नहीं बन जाता, और इससे उस पर हमले की अनुमति तो बिल्कुल नहीं मिलती।
- **फ़िल्म:** NAZA की गिनती वयस्कों और बच्चों में अंतर नहीं करती।
  **आईडीएफ:** अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून की यही माँग है: उम्र चाहे जो हो, नागरिक नागरिक ही है और किसी भी नागरिक के जीवन का मूल्य कम नहीं है। पूरे युद्ध के दौरान नागरिकों, ख़ासकर बच्चों, की मौजूदगी के कारण कमांडरों ने हमले रद्द किए, टाले या उनकी योजना बदली।
- **फ़िल्म:** हमलों के बाद नागरिकों की मौत की कभी जाँच नहीं हुई।
  **आईडीएफ:** आईडीएफ की कई इकाइयाँ हमलों के नतीजों की समीक्षा करती हैं, जिनमें नागरिकों को हुई क्षति की रिपोर्टें भी शामिल हैं। साक्षात्कार देने वाले लोग इन इकाइयों में नहीं थे। इन समीक्षाओं के बाद सैकड़ों घटनाओं की जाँच-पड़ताल हुई, और सैन्य महाधिवक्ता आपराधिक जाँच शुरू करने का फ़ैसला करते हैं।
- **फ़िल्म:** कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने ऐसे हज़ारों लक्ष्य बनाए जिन पर हमले किए गए।
  **आईडीएफ:** कृत्रिम बुद्धिमत्ता यह तय नहीं करती कि कोई वस्तु या व्यक्ति लक्ष्य है या नहीं, और न ही यह कि किसी लक्ष्य पर हमला होगा या नहीं। मानव विश्लेषक तय प्रक्रियाओं के तहत लक्ष्य पहचानते हैं; अधिकृत ख़ुफ़िया अधिकारी उन्हें मंज़ूरी देता है; और व्यापक योजना प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अभियान के कमांडर के फ़ैसले पर समाप्त होती है। डेटा उपकरण विश्लेषकों को केवल पहले से जुटाई गई जानकारी का मिलान करने में मदद करते हैं।
- **फ़िल्म:** सैनिकों ने सहायता वितरण स्थलों के पास नागरिकों पर गोलियाँ चलाईं।
  **आईडीएफ:** आईडीएफ के निर्देश नागरिकों को निशाना बनाने पर रोक लगाते हैं। इन स्थलों के पास कार्रवाई के नियम केवल आतंकवादियों और तत्काल ख़तरा पैदा करने वाले संदिग्धों पर गोली चलाने की अनुमति देते थे। ये स्थल युद्ध क्षेत्र में संचालित होते थे, जहाँ आतंकवादी जानबूझकर भीड़ में घुलमिल जाते थे। दुखद घटनाओं के बाद जाँच-पड़ताल की गई, पहुँच के रास्ते, संकेतक और अवरोध लगाए गए, तथा असाधारण घटनाएँ जनरल स्टाफ की तथ्य-जाँच व्यवस्था को भेजी गईं।
- **फ़िल्म:** जहाँ एक चौथाई निवासी रह गए थे, वहाँ इमारतों पर “एल्गोरिदम के अनुसार” बम गिराए गए, क्योंकि उन्हें चेतावनी दी जा चुकी थी।
  **आईडीएफ:** किसी एल्गोरिदम ने कभी हमले का फ़ैसला नहीं किया। हमले की शुरुआत सैन्य उद्देश्य से होती है; उसके बिना कोई योजना नहीं बनती, चाहे नागरिकों की संख्या कुछ भी हो। चेतावनी देने से वहाँ रह गए नागरिकों की अनदेखी करने की अनुमति कभी नहीं मिलती। जहाँ हमास ने इमारतों के समूहों को लड़ाई के ठिकानों में बदला, वहाँ भी हर इमारत को अलग से लक्ष्य घोषित करना और उसके लिए अनुपातिकता का आकलन करना ज़रूरी था।
- **फ़िल्म:** आईडीएफ में यह धारणा फैल गई कि ग़ज़ा में कोई भी नागरिक लड़ाई से असंबद्ध नहीं है।
  **आईडीएफ:** लड़ाई में भाग लेने वालों और नागरिकों के बीच अंतर आईडीएफ के हर लक्ष्य निर्धारण निर्देश में दर्ज है। एक साक्षात्कारकर्ता की भावना आईडीएफ, उसके कमांडरों या उसके आदेशों का प्रतिनिधित्व नहीं करती। वह उन चेतावनियों, सावधानी से बनाई गई योजनाओं और रद्द किए गए हमलों का भी प्रतिनिधित्व नहीं करती, जिनसे इस अंतर को व्यवहार में लागू किया गया।
- **फ़िल्म:** एक साक्षात्कारकर्ता से पूछा गया कि क्या यह नरसंहार था, और उसने हाँ कहा।
  **आईडीएफ:** यह आरोप घोर आपत्तिजनक और निराधार है। जो लोग विशेषज्ञ नहीं हैं और कमान के फ़ैसलों में शामिल भी नहीं थे, उनसे किसी क़ानूनी शब्द पर निजी राय पूछना भ्रामक और अप्रासंगिक है। नरसंहार के लिए किसी समूह को नष्ट करने का विशिष्ट इरादा होना आवश्यक है, और ऐसा कोई इरादा कभी था ही नहीं। युद्ध के उद्देश्य हमास को ख़त्म करना और बंधकों को घर वापस लाना थे। आईडीएफ ने उसी आबादी की रक्षा के लिए चेतावनियाँ दीं, हमले रद्द किए और सहायता पहुँचाने में मदद की, जिसके बारे में फ़िल्म कहती है कि वह उसे नष्ट करना चाहता था।

“युद्ध के दुखद परिणाम तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने को सही नहीं ठहराते। नागरिकों को हुई क्षति पर गंभीर चर्चा के लिए यह बताना ज़रूरी है कि फ़ैसले वास्तव में कैसे लिए गए। फ़िल्म ठीक यही बताने में विफल रहती है।”

## आलोचकों ने क्या पाया

इज़राइल और विदेशों के पत्रकारों, आलोचकों, सैन्य अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों ने फ़िल्म की जाँच की और अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए। कुछ सबसे तीखी टिप्पणियाँ उन लेखकों की थीं जो इज़राइल की सरकार का विरोध करते हैं और युद्ध के दौरान सेना के आचरण की आलोचना कर चुके हैं। उनके शब्द प्रकाशित रूप के अनुसार उद्धृत हैं, जहाँ ज़रूरी था वहाँ अनुवाद किया गया है, और हर मूल स्रोत का लिंक दिया गया है।

### जाँचने के लिए ठोस विवरण नहीं

फ़िल्म का पक्ष गुमनाम आवाज़ों पर टिका है। नाम, यूनिट, तारीख़, जगह या हमले का विवरण नहीं दिया गया, इसलिए उसके किसी भी दावे की पुष्टि या उसका खंडन नहीं किया जा सकता।

> एक पत्रकार के तौर पर, मुझे नहीं लगता कि मैं इसे प्रसारित करता। क्योंकि जिन बेहद, बेहद गंभीर बातों का वे वर्णन करते हैं, उनके समर्थन में आप कोई सबूत नहीं देते। हमारे पास उनके नाम या उनकी यूनिट की जानकारी नहीं है, जिससे पता चले कि वे सचमुच उस जानकारी तक पहुँचे थे जिसके बारे में वे बात कर रहे हैं।
>
> खोजी पत्रकार रविव ड्रकर, चैनल 13, युवाल अब्राहम से, [Jewish News](https://www.jewishnews.co.uk/new-documentary-about-idf-strikes-in-gaza-causes-anger-in-israel/), 2026-09-15

> किसी भी दावे की पुष्टि दूसरे साक्ष्य से नहीं होती। तारीख़ों, नामों और साक्षात्कार देने वालों की यादों से आगे ठोस विवरण की कमी आलोचकों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण गुंजाइश छोड़ती है।
>
> वरिष्ठ संपादक गैल बेकरमैन, [The Atlantic](https://www.theatlantic.com/culture/2026/09/missed-opportunity-documentary-movie-naza/688832/), 2026-09-30

> फ़िल्म निर्माताओं ने आरोपों के विषय—इस मामले में इज़राइल रक्षा बल—को प्रकाशन से पहले जवाब देने का अवसर नहीं दिया, जबकि यह एक मानक प्रक्रिया है।
>
> सैन्य और अरब मामलों के संवाददाता इमैनुएल फ़ैबियन और नूरित योहानन, [The Times of Israel](https://www.timesofisrael.com/nazas-claims-about-idf-conduct-in-gaza-are-grave-so-are-the-films-journalistic-flaws/), 2026-09-27

> फ़िल्म की पत्रकारिता से जुड़ी समस्या ठीक यहीं है। उसका पक्ष पूरी तरह गुमनाम बयानों पर टिका है।
>
> एआरडी के तेल अवीव ब्यूरो के पूर्व प्रमुख रिचर्ड सी. श्नाइडर, [Neue Zürcher Zeitung](https://www.nzz.ch/feuilleton/kino-fernsehen-streaming/fuehrt-israel-den-krieg-wie-ein-videospiel-was-naza-zeigt-und-was-nicht-ld.10026098), 2026-10-01

> NAZA में पाँच बुनियादी ‘W’ सवालों में से एक का भी जवाब नहीं है।
>
> खोजी पत्रकार बारुख क्रा, [Walla! News](https://www.walla.co.il/news/opinions/383956783), 2026-10-08

> लोकतंत्र विरोधी परंपरा के बेहतरीन नमूने जैसा सार्वजनिक मुक़दमा (मुसोलिनी वाला कहें या स्तालिन वाला, आप चुन लें)। अभियोजक: चेहरे छिपे हुए। मामला पेश करने का तरीक़ा: बयानों के अंश जोड़कर बनाया गया संकलन। बचाव पक्ष के वकील: कोई नहीं। तीसरे पक्ष: कोई नहीं। अध्यक्षता करने वाला न्यायाधीश: मुक़दमे में मौजूद भीड़। फ़ैसला (अपने आप): दोषी।
>
> इतिहासकार मिशेले सरफ़ात्ती, पिएरलुइजी बतिस्ता द्वारा उद्धृत, [Il Foglio](https://www.ilfoglio.it/en/television/2026/09/14/news/how-fauda-responds-to-naza--407498), 2026-09-14

### गवाहों के मुँह में डाले गए शब्द

कैमरे पर नरसंहार के सवाल पर मिला एकमात्र “हाँ” साक्षात्कारकर्ता के अपने सवाल का जवाब है।

> ध्यान दीजिए कि साक्षात्कार देने वाला यह बात सीधे नहीं कहता। अब्राहम अपने सवाल में उसके मुँह में यह शब्द डालते हैं, और उसके बाद वह इस आकलन से सहमत होता है। पत्रकारिता की दृष्टि से यह जवाब सुझाने वाला सवाल है।
>
> संस्कृति संपादक टिम कैस्पर बोहमे, [taz](https://taz.de/Debatte-um-Dokumentarfilm-Naza/!6211185/), 2026-09-27

> साक्षात्कार देने वालों में से केवल एक यह शब्द इस्तेमाल करता है, और वह भी तभी जब फ़िल्म निर्माताओं में से एक, युवाल अब्राहम, उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित करते हैं। लेकिन इन बातचीतों में मुझे इरादे की बात सुनाई नहीं दी; सच कहूँ तो दुश्मनी या मारने की इच्छा भी सुनाई नहीं दी।
>
> वरिष्ठ संपादक गैल बेकरमैन, [The Atlantic](https://www.theatlantic.com/culture/2026/09/missed-opportunity-documentary-movie-naza/688832/), 2026-09-30

> कैमरे पर बोलने के लिए राज़ी हुए 24 गुमनाम सैनिकों और रिज़र्व सैनिकों में से एक से पूछा जाता है कि क्या उसे लगता है कि इज़राइल नरसंहार कर रहा है, और वह “हाँ” कहता है। जब लगभग 20 दूसरे लोगों से यह सवाल पूछा गया तो उन्होंने क्या कहा? कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
>
> फ़िल्म समीक्षक यिशाई किचेल्स, [Israel Hayom](https://www.israelhayom.co.il/culture/films/article/21518084), 2026-09-30

### इन संख्याओं का असल मतलब

इस प्रणाली में काम कर चुके अधिकारियों के अनुसार, NAZA की संख्या तय करती है कि हमले की मंज़ूरी किससे लेनी होगी और नुकसान कम करने के लिए क्या कदम उठाने होंगे। यह उतने लोगों को मारने की अनुमति नहीं है।

> NAZA 20, 20 लोगों को मारने की अनुमति नहीं थी। यह एक वर्गीकरण था, जिसके आधार पर प्रस्तावित हमले को उचित समीक्षा और मंज़ूरी की प्रक्रिया से गुज़ारा जाता था।
>
> लेफ़्टिनेंट कर्नल (रिज़र्व) याइर मिरोन, सैन्य ख़ुफ़िया विभाग, [yairmiron.com](https://www.yairmiron.com/media/yair-miron-naza-manipulations-en), 2026-10-04

> जब मंज़ूरी की प्रक्रिया में ‘NAZA 500—अनुमानित आकस्मिक नुकसान 500’ लिखा आता है, तो इसका मतलब है कि आकस्मिक नुकसान कम करने के लिए कदम उठाने होंगे।
>
> लेफ़्टिनेंट कर्नल (रिज़र्व) सारित ज़ेहावी, आईडीएफ की नागरिकों को चेतावनी देने वाली यूनिट की सह-संस्थापक, [The Times of Israel](https://blogs.timesofisrael.com/the-truth-about-naza-or-collateral-damage/), 2026-09-17

> आकस्मिक नुकसान दर्ज करने का मतलब यह नहीं कि हम अपने आप हमला कर देंगे। इसके उलट, मक़सद जोखिमों की पहचान करना है ताकि हम उन्हें रोकने या कम करने के तरीक़े सोच सकें।
>
> लेफ़्टिनेंट कर्नल (रिज़र्व) सारित ज़ेहावी, आईडीएफ की नागरिकों को चेतावनी देने वाली यूनिट की सह-संस्थापक, [JNS](https://www.jns.org/news/israel-news/naza-documentary-fails-to-show-idf-efforts-to-prevent-civilian-casualties-former-officer-says), 2026-09-28

> मैं हज़ारों हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के लिए ज़िम्मेदार था। मैंने ऐसी संख्या कभी नहीं देखी, इसके आसपास की भी नहीं। मैं पूरे यक़ीन से कह सकता हूँ: ऐसे किसी अभियान को मंज़ूरी नहीं दी गई थी।
>
> रिज़र्व कर्नल, लड़ाकू विमान के पायलट और रमत डेविड हवाई अड्डे के पूर्व कमांडर, 500 के दावे पर, [Jüdische Allgemeine](https://www.juedische-allgemeine.de/israel/kampfpilot-weist-vorwuerfe-von-naza-zurueck/), 2026-09-17

> भीतर से मुझे बार-बार जो आलोचना सुनने को मिली, वह यह नहीं थी कि वायुसेना हमला करने के लिए बहुत उतावली थी। आलोचना यह थी कि वह बहुत ज़्यादा सावधानी बरत रही थी।
>
> वायुसेना के योजना और अभियान निदेशालय में रिज़र्व सैनिक एवी लुइस, [The Times of Israel](https://blogs.timesofisrael.com/i-worked-with-the-real-naza-heres-what-the-film-gets-wrong/), 2026-10-07

> अगर यह सारी लापरवाह तबाही हो रही थी, तो ग़ज़ा के अपने आँकड़ों में यह दिखाई क्यों नहीं देती?
>
> फ़िल्म समीक्षक और स्तंभकार काइल स्मिथ, [The Wall Street Journal](https://www.wsj.com/opinion/free-expression/naza-has-nada-on-israel-33203a03), 2026-11-02

### फ़िल्म में क्या छूट गया

7 अक्टूबर, बंधक, घरों, अस्पतालों और सुरंगों से हमास के आतंकवादियों का लड़ना, और दी गई चेतावनियाँ तथा रद्द किए गए हमले—इन सबका फ़िल्म में बहुत कम ज़िक्र है।

> यह युद्ध ग़ज़ा तक कैसे पहुँचा—हमास का 7 अक्टूबर 2023 का नरसंहार और लोगों को बंधक बनाना—फ़िल्म के दायरे से लगभग बाहर है।
>
> ओमर शेम टोव, जिन्हें हमास ने 505 दिनों तक बंधक बनाकर रखा, [The Wall Street Journal](https://www.wsj.com/opinion/hostages-like-me-were-also-nazacollateral-damage-7cfeb4aa), 2026-09-22

> अगर इज़राइल के बम से मेरी मौत होती, तो हमास दो बार जीतता: मैं मर जाता और ज़िम्मेदारी इज़राइल पर आती।
>
> ओमर शेम टोव, जिन्हें हमास ने 505 दिनों तक बंधक बनाकर रखा, [The Wall Street Journal](https://www.wsj.com/opinion/hostages-like-me-were-also-nazacollateral-damage-7cfeb4aa), 2026-09-22

> इस बात के व्यापक और ठोस सबूत हैं कि हमास नागरिकों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल करता है।
>
> खोजी पत्रकार रविव ड्रकर, [Haaretz](https://www.haaretz.co.il/opinions/2026-09-14/ty-article-opinion/.highlight/000001a0-9b2e-dfa9-ada3-db6e79a80000), 2026-09-14

> हमास की असममित युद्ध रणनीति, उसकी व्यापक सुरंग प्रणाली और सैन्य ढाँचे के लिए घनी आबादी वाले इलाक़ों का उसका इस्तेमाल—इन पर मुश्किल से ही बात की गई है। फ़िल्म यह भी नहीं बताती कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के तहत भी बहुत विशिष्ट परिस्थितियों में नागरिक हताहतों को स्वीकार्य माना जाता है।
>
> एआरडी के तेल अवीव ब्यूरो के पूर्व प्रमुख रिचर्ड सी. श्नाइडर, [Neue Zürcher Zeitung](https://www.nzz.ch/feuilleton/kino-fernsehen-streaming/fuehrt-israel-den-krieg-wie-ein-videospiel-was-naza-zeigt-und-was-nicht-ld.10026098), 2026-10-01

> एक तथ्य को ऐसी सेना की तस्वीर से मिलाना ख़ास तौर पर मुश्किल है जिसे नागरिकों की जान की परवाह न हो: इज़राइल ने बड़े अभियानों और हमलों से पहले ग़ज़ा के लोगों को बार-बार चेतावनी दी।
>
> एरी ब्लिट्ज़, [Washington Examiner](https://www.washingtonexaminer.com/op-eds/4748795/naza-documentary-venice-fact-check/), 2026-10-01

> वे हिसाब लगा रहे हैं कि हमला करने पर कितना आकस्मिक नुकसान होगा—क़ानून इसकी माँग करता है—और उसे सीमित करने के लिए इतिहास में किसी से भी ज़्यादा सावधानियाँ बरत रहे हैं।
>
> शहरी युद्ध के विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर, [Breitbart](https://www.breitbart.com/politics/2026/10/07/exclusive-urban-warfare-expert-john-spencer-gaza-genocide-libel-against-israel-is-greatest-lie-in-modern-history/), 2026-10-07

### स्वतंत्र जाँच नहीं

द गार्डियन ने वे जाँच-पड़ताल प्रकाशित की थीं जिन पर फ़िल्म आधारित है, और उसी ने फ़िल्म का निर्माण भी किया। निर्देशक ने कहा कि उन्होंने हर मामले की पुष्टि नहीं की।

> न नाम, न रैंक, न यूनिट, न तारीख़। द गार्डियन ने वे जाँच-पड़ताल प्रकाशित कीं जिन पर फ़िल्म आधारित है, वह इसका निर्माण करता है, और उसके एक पत्रकार ने संपादन में मदद की।
>
> एक होलोकॉस्ट उत्तरजीवी और 28 सार्वजनिक हस्तियाँ, एक खुले पत्र में, [Alliance](https://www1.alliancefr.com/actualites/tribune-une-rescapee-de-la-shoah-et-vingt-huit-personnalites-contre-le-film-naza-6135461), 2026-10-16

> जब इज़राइली खोजी पत्रकार रविव ड्रकर ने एक साक्षात्कार में पूछा कि क्या उन्होंने गुमनाम इज़राइलियों के दावों की पुष्टि करने की कोशिश की थी, तो अब्राहम ने माना कि कथित तौर पर बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत से जुड़े सभी मामलों की उन्होंने पुष्टि नहीं की थी।
>
> CAMERA UK के सह-संपादक एडम लेविक, [JNS](https://www.jns.org/opinion/adam-levick/the-premise-of-naza-doesnt-hold-up), 2026-09-20

> जिस क्षण आप इस बात पर फ़िल्म बनाते हैं कि सेना ने आतंकवादियों और नागरिक पीड़ितों के बीच अनुपात तय करने की कोशिश कैसे की, उसी क्षण आप नरसंहार के तर्क को पूरी तरह ख़ारिज कर देते हैं।
>
> योसी क्लाइन हालेवी, शालोम हार्टमैन इंस्टीट्यूट, [Il Foglio](https://www.ilfoglio.it/esteri/2026/09/17/news/se-anche-hamas-elogia-naza--407781), 2026-09-17

> आकस्मिक नुकसान का मतलब ही उन लोगों को पहुँची हानि है जो निशाना नहीं थे। नरसंहार के लिए इसके उलट, किसी जनसमूह को नष्ट करने का विशिष्ट इरादा होना ज़रूरी है। फ़िल्म दोनों बातें एक साथ नहीं कह सकती।
>
> वायुसेना के योजना और अभियान निदेशालय में रिज़र्व सैनिक एवी लुइस, [The Times of Israel](https://blogs.timesofisrael.com/i-worked-with-the-real-naza-heres-what-the-film-gets-wrong/), 2026-10-07

### ‘नाज़ी’ की गूँज

अलग-अलग विचारधाराओं के आलोचकों ने ध्यान दिलाया कि शीर्षक के लिए अंग्रेज़ी के बजाय हिब्रू शब्द चुना गया, और यह शब्द सुनने में कैसा लगता है।

> जो कोई और इस शब्द से पहली बार रूबरू हो, उसे यह ग़ज़ा और नाज़ी को मिलाकर बनाया गया एक विकृत शब्द लग सकता है, या कम से कम उसका ध्यान गैस चैंबरों की ओर जा सकता है। मुझे नहीं लगता कि यह संयोग है।
>
> वरिष्ठ संपादक गैल बेकरमैन, [The Atlantic](https://www.theatlantic.com/culture/2026/09/missed-opportunity-documentary-movie-naza/688832/), 2026-09-30

> आम अंग्रेज़ी शब्द के बजाय ‘नाज़ी’ शब्द के इतने क़रीब लगने वाला संक्षिप्त शब्द चुनना कोई दुर्घटना नहीं थी।
>
> CAMERA UK के सह-संपादक एडम लेविक, [JNS](https://www.jns.org/opinion/adam-levick/the-premise-of-naza-doesnt-hold-up), 2026-09-20

## संक्षेप में

- **फ़िल्म दिखाए जाने से पहले.** चुने हुए छोटे समूहों के लिए बंद दरवाज़ों के पीछे फ़िल्म दिखाना और उस फ़िल्म को मीडिया में व्यापक कवरेज मिलना, जिसे आम लोग अभी देख भी नहीं सकते थे, सूचना का खालीपन पैदा कर गया। दर्शकों ने उसे अपनी आशंकाओं से भर लिया और फ़िल्म देखने से पहले ही कवरेज से बनी धारणा लेकर पहुँचे।
- **फ़िल्म के भीतर.** हर दृश्य में प्रभाव डालने का कोई न कोई तरीका है: सम्मोहक भाषा, संदर्भ हटाना, बात को नए अर्थ में पेश करना, जवाब को दिशा देने वाले सवाल, दृश्य और ध्वनि से बनाए गए संकेत, घटनाक्रम को एक ही समय का दिखाना और होलोकॉस्ट से तुलना मन में बैठाना। सबसे अधिक इस्तेमाल होता है ग़ज़ा में बमबारी का वर्णन करते सैनिकों से अचानक तेल अवीव की रोशन बालकनियों और बैठक कमरों पर कट करना।
- **साक्षात्कारकर्ता.** फ़िल्म के सह-निर्देशक युवाल अब्राहम निष्पक्ष ढंग से सवाल नहीं करते। वे बीच में टोकते हैं, सैनिक को कलम और काग़ज़ थमाते हैं, पहले से अर्थ तय कर देने वाली परिभाषाओं पर ज़ोर देते हैं (“क्या बच्चा NAZA 1 है?”), आँकड़ों को नए संदर्भ में रखते हैं (“500 इज़राइल में एक छोटे शहर जितने हैं”) और अपराधबोध को व्यक्ति की पहचान से जोड़ देते हैं (“तुम पहले ही इसमें हिस्सा ले चुके हो”)।
- **होलोकॉस्ट का संदर्भ.** फ़िल्म के आख़िरी हिस्से में होलोकॉस्ट के प्रतीकों—स्मरण में बजने वाला सायरन, क्लॉद लांज़मान को श्रद्धांजलि, रेल इंजन, पटरियाँ और धुआँ—को आज के ग़ज़ा से जोड़ा जाता है। इस तरह यहूदी राज्य को उसकी अपनी स्मृतियों के सहारे होलोकॉस्ट करते हुए दिखाया जाता है।
- **साक्ष्य.** सुनी-सुनाई बात को तथ्य की तरह पेश किया जाता है: शवों को खाते कुत्तों का वर्णन करने वाला सैनिक कहता है कि उसने यह खुद नहीं देखा। सामूहिक कब्रों का वर्णन शब्दों में है, उनका कोई फ़ुटेज नहीं दिखाया जाता। महिलाएँ, बच्चे और बुज़ुर्ग लगभग दिखाई ही नहीं देते। दूर से स्नाइपर की गोलीबारी में शवों का “एक के ऊपर एक” गिरना गोलियों की मारक गति और मानव व्यवहार, दोनों से मेल नहीं खाता।

## 1. प्रदर्शन से पहले

> अगर वे इसे हमसे छिपा रहे हैं, तो इसमें ज़रूर ऐसी खरी सच्चाई होगी जिसे दिखाने से सत्ता प्रतिष्ठान डरता है।
>
> सीमित पहुँच दर्शकों के मन में परोक्ष रूप से यही धारणा पैदा करती है

फ़िल्म का पहला दृश्य आने से पहले ही उसकी रिलीज़ ने दर्शकों पर असर डालना शुरू कर दिया था। चुनिंदा लोगों के लिए बंद प्रदर्शन और ऐसी फ़िल्म पर व्यापक चर्चा, जिसे आम लोग अभी देख नहीं सकते थे, ने उत्सुकता, किसी छिपी बात को जानने का एहसास और एक तय सार्वजनिक धारणा पैदा की।

### 1. एक ऐसी फ़िल्म जिसे देखा नहीं जा सकता था

NAZA चुनिंदा दर्शकों को दिखाई गई, जबकि साक्षात्कारों, टीवी कार्यक्रमों और लेखों में उस फ़िल्म पर चर्चा होती रही जिसे आम लोग अभी देख नहीं सकते थे।

- **गुप्त खोज का आभामंडल.** प्रदर्शन में शामिल लोग सबसे पहले पहुँच पाने वाले एक विशिष्ट समूह का हिस्सा बन जाते हैं। बाकी लोग फ़िल्म के बारे में सुनते हैं और इंतज़ार करते हैं। इस इंतज़ार से पैदा हुई खाली जगह में वे अपनी सबसे भयावह कल्पनाएँ भर देते हैं। किसी के एक भी दृश्य देखने से पहले हर आँकड़ा और हर आरोप बड़ा होता जाता है।
- **शीर्षक.** फ़िल्म का नाम अंग्रेज़ी शब्द के बजाय NAZA रखा गया है। यह आकस्मिक क्षति के लिए इस्तेमाल होने वाले हिब्रू सैन्य पद ‘नेज़ेक अगावी’ का संक्षिप्त रूप है। यह संक्षिप्त नाम सुनने में किसी अरबी नाम जैसा भी लगता है।

### 2. सूचना के खालीपन का असर

मीडिया ऐसी फ़िल्म पर लगातार चर्चा करता है जिसे अभी देखा नहीं जा सकता।

- **निष्कर्ष तक पहुँचने की बेचैनी.** अनिश्चितता मन को परेशान करती है। जब किसी फ़िल्म की चर्चा हो, लेकिन उसे देखा न जा सके, तो जानकारी का खालीपन पैदा होता है।
- **डर को आरोप में ढालना.** यह खालीपन तथ्यों से नहीं, आशंकाओं से भरता है। एक भी दृश्य देखे जाने से पहले कल्पना आरोप की दिशा तय कर देती है।

### 3. वर्जित चीज़ का आकर्षण और कृत्रिम कमी

फ़िल्म तक पहुँच सीमित रखी जाती है, जबकि उसकी चर्चा बढ़ती जाती है।

- **पहुँच न मिलना ही प्रमाण बन जाता है.** पहुँच रोके जाने पर यह धारणा जमने लगती है कि जो छिपाया जा रहा है, वह सच ही होगा। प्रदर्शन कक्ष में बैठे दर्शक खुद को भीड़ से नैतिक और बौद्धिक रूप से ऊपर महसूस करते हैं। फ़िल्म पर संदेह करने का मतलब होगा उस प्रबुद्ध समूह में अपनी जगह खोना।
- **सीमित संस्करण जैसा प्रचार.** महँगे फ़ैशन उत्पाद के सीमित संस्करण की तरह, फ़िल्म को थोड़ा-थोड़ा उपलब्ध कराना उसकी माँग बढ़ाता है। ‘तूफ़ान खड़ा कर रही, लेकिन दिखाई नहीं जा रही फ़िल्म’ पर हर समाचार बुलेटिन उसे ऐसा मुफ़्त प्रचार देता है जिसे पैसे से खरीदना मुश्किल होता।
- **पहले से गढ़ी गई सार्वजनिक धारणा.** जब फ़िल्म आखिरकार बड़े दर्शक वर्ग तक पहुँचती है, तो लोग उसमें वही ढूँढ़ने के लिए तैयार होकर आते हैं जो ख़बरें उन्हें पहले ही बता चुकी होती हैं। वे उसकी जाँच करने नहीं आते।

## 2. पहला दृश्य

> अगर मैं अपना चेहरा दिखाकर साक्षात्कार दूँ, तो इज़राइल मुझे उनकी पोल खोलने के लिए जेल में डाल देगा।
>
> फ़िल्म की पहली गवाही में छत पर मौजूद एक सैनिक

शुरुआती मिनटों में फ़िल्म खुद को वृत्तचित्र घोषित करती है, इज़राइली ख़ुफ़िया तंत्र की परिचित छवि का सहारा लेती है, अचानक अँधेरे दृश्य पर कट करके दर्शक की अपेक्षा तोड़ती है और इज़राइल राज्य को बोलने वालों का उत्पीड़न करने वाली सत्ता के रूप में पेश करती है।

### 4. विश्वसनीयता का ढाँचा

फ़िल्म की शुरुआत इस घोषणा से होती है कि यह एक वृत्तचित्र है और पहचान छिपाने के लिए चेहरों को धुँधला किया गया है। फिर वह इज़राइली ख़ुफ़िया कोर पर बनी एक पुरानी श्वेत-श्याम फ़िल्म पर कट करती है।

- **पहले से धारणा बनाना.** कुछ भी दिखाने से पहले दर्शक को बताया जाता है कि आगे जो आएगा वह दर्ज तथ्य है, और उसे साझा करना इतना ख़तरनाक है कि बोलने वालों को अपनी जान का डर है। यह ढाँचा भीतर के आलोचक को पहले ही चुप करा देता है: वृत्तचित्र को सोची-समझी राजनीतिक प्रस्तुति के बजाय तथ्य मान लिया जाता है।

### 5. गुप्त खुलासे का असर

पुराने संग्रह के दृश्य में वर्दी पहने छात्र अरबी व्याकरण (‘अरबी क्रिया’) सीख रहे हैं। इसके तुरंत बाद दृश्य अँधेरे में बयान देते एक सैनिक पर कट होता है।

- **परिचित छवि के साथ चलना.** पश्चिमी दर्शक फ़ौदा और तेहरान जैसी सीरीज़ से दक्ष इज़राइली ख़ुफ़िया तंत्र की छवि पहचानते हैं। फ़िल्म पहले उसी परिचित, लगभग निर्दोष लगने वाली तस्वीर से मेल बैठाती है, फिर दर्शक को उससे दूर ले जाती है।
- **विदेशी दर्शकों के लिए कारण और परिणाम.** शिक्षक का कहा शब्द ‘क्रिया’ एक आधार बन जाता है, जिसे संपादन मौत का हिसाब लगाने वाली डिजिटल प्रणाली से जोड़ देता है। इज़राइल की भाषा और शिक्षा को विनाश की एक निर्मम व्यवस्था की बुनियाद जैसा दिखाया जाता है।
- **अचानक अपेक्षा तोड़ना.** रोशन कक्षा से घुप अँधेरे में कट दर्शक को एक पल में इतिहास के पाठ से षड्यंत्र पर बनी थ्रिलर में पहुँचा देता है। इससे वह आगे की बातों को उजागर हुए रहस्यों की तरह ग्रहण करने के लिए तैयार होता है।

### 6. राज्य का भय

छत पर साक्षात्कारकर्ता कहता है: “तुम्हें शहर दिखता है, लेकिन शहर तुम्हें नहीं देखता।” कैमरा ऊपर से तेल अवीव को दिखाता है।

- **राज्य को दुश्मन के रूप में पेश करना.** इज़राइल को अपने रहस्य सुरक्षित रखने वाले लोकतंत्र के रूप में नहीं, जैसा हर राज्य करता है, बल्कि बोलने वालों का उत्पीड़न करने वाली सत्ता के रूप में दिखाया जाता है।
- **‘बिग ब्रदर’ का रूपक.** यह अस्पष्ट, सम्मोहक वाक्य दूरी का एहसास और सत्ता की अशुभ छवि पैदा करता है। तेल अवीव जीवन और मृत्यु के फ़ैसले करने वालों के नीचे बसा एक अंधा, उदासीन शहर बन जाता है।

## 3. छत पर साक्षात्कार

> वे यह नहीं कहते कि पंद्रह लोग मारे जाएँगे। वे कहते हैं, NAZA 15।
>
> लक्ष्य चुनने की प्रणाली का वर्णन करता एक सैनिक

साक्षात्कारकर्ता बातचीत की कमान अपने हाथ में लेता है, चित्र बनाने के अभ्यास से ध्यान एक जगह केंद्रित करता है और सैनिक को एक तकनीकी शब्द से सबसे अधिक भावनात्मक असर वाले शब्द तक ले जाता है: शिशु।

### 7. काग़ज़ और पेंसिल

सैनिक लक्ष्य चुनने की प्रणाली के इंटरफ़ेस का अमूर्त शब्दों में वर्णन करने लगता है। साक्षात्कारकर्ता बीच में टोकता है: “ज़रा इसे बनाकर दिखाओ, हमें समझने में मदद मिलेगी,” और उसे काग़ज़ और पेंसिल थमा देता है।

- **बातचीत की कमान लेना.** आत्मविश्वास भरे हाथ के इशारों से साक्षात्कारकर्ता सैनिक की लय से मेल बैठाता है और साथ ही अपना अधिकार स्थापित करता है। बातचीत वही चलाता है।
- **ध्यान सीमित करना.** हाथ से किया जाने वाला एक छोटा काम सैनिक और दर्शक, दोनों का ध्यान एक संकरी तस्वीर पर ले आता है। एक निर्देश मान लेने वाले व्यक्ति के लिए अगला निर्देश मानना आसान हो जाता है। यहाँ अगला निर्देश है जानकारी को बिना परखे स्वीकार करना।
- **संज्ञा में बदलना और दोहराव.** “NAZA 20, NAZA 20, NAZA 20 अचानक एक मानक बन गया” मंत्र की तरह काम करता है। पश्चिमी सेनाओं में नागरिकों को होने वाली क्षति सीमित करने और मापने के लिए इस्तेमाल होने वाले सैन्य शब्द को अमानवीकरण के औज़ार के रूप में पेश किया जाता है।

### 8. शिशु शब्द का असर

तेज़ और दबाव भरी बातचीत में साक्षात्कारकर्ता शिशुओं के बारे में स्पष्ट जवाब लेने पर अड़ा रहता है।

> **साक्षात्कारकर्ता:** NAZA में, मान लो, बच्चों और शिशुओं के लिए कोई फ़र्क किया जाता है?
>
> **सैनिक:** नहीं! कोई फ़र्क नहीं!
>
> **साक्षात्कारकर्ता:** एक शिशु NAZA 1 है?
>
> **सैनिक:** हाँ!

- **सीधा सुझाव.** साक्षात्कारकर्ता किसी भी भाषा के सबसे भावनात्मक शब्दों में से एक लाता है और सैनिक से इस बराबरी की पुष्टि करवाता है: आईडीएफ कंप्यूटर प्रोग्राम में शिशुओं को संख्या के रूप में गिनता है। अगला कदम, यहूदियों को संख्याओं में बदल देने वाले नाज़ियों से तुलना, दर्शक पर छोड़ दिया जाता है।
- **संदर्भ हटा देना.** तेज़ बातचीत वह संदर्भ हटा देती है जिसकी दर्शक को आकलन करने के लिए ज़रूरत होती। वास्तव में यह प्रणाली नागरिकों की जान की गिनती कमांडरों पर सीमा लगाने के लिए करती है, ताकि सैन्य उद्देश्य पूरा हो और जहाँ संभव हो, निर्दोष लोगों को नुकसान से बचाया जाए।

### 9. एक व्यक्ति के लिए 500, और एक छोटा कस्बा

सैनिक कहता है: “एक व्यक्ति के लिए, लगभग 500 की मंज़ूरी मिली थी,” यानी एक व्यक्ति पर हमला करने के लिए 500 नागरिकों की मौत की मंज़ूरी। साक्षात्कारकर्ता जवाब देता है: “500 तो इज़राइल राज्य में एक छोटा कस्बा है।”

- **ज़रूरी विवरण हटा देना.** कब, कहाँ और वह व्यक्ति कौन था: क्या वह किसी भूमिगत परिसर में छिपा सिनवार या मोहम्मद देइफ़ जैसा शीर्ष आतंकवादी था? किस नुकसान को रोका गया? इनमें से कुछ नहीं बताया जाता।
- **आँकड़े का अर्थ बदलना.** साक्षात्कारकर्ता संख्या को ग़ज़ा में हुए एक हमले से उठाकर इज़राइल के एक समुदाय के मिट जाने की तस्वीर में बदल देता है, ताकि इज़राइली दर्शक को झटका लगे और वह उससे अपना जुड़ाव महसूस करे।

### 10. “कंप्यूटर गेम जैसा”

सैनिक कहता है: “यह कंप्यूटर गेम जैसा है... क्योंकि सब कुछ दूर से होता है।”

- **दो अलग बातों को बराबर ठहराना.** दो अलग बातों को एक बना दिया जाता है: दूर से चलने वाली प्रणाली को खेल के बराबर रखा जाता है, और इससे हर सैनिक को नैतिक रूप से उदासीन मान लिया जाता है। फ़िल्म यह छोड़ देती है कि हर आधुनिक सेना में दूरी से काम करना संचालन की ज़रूरत है और अपने आप में किसी बात का सबूत नहीं है।

## 4. तेल अवीव की खिड़कियाँ

> लेकिन तुम तो इसमें पहले ही हिस्सा ले चुके हो।
>
> साक्षात्कारकर्ता, जो सैनिक को उसके अपराधबोध से घेरता है

फ़िल्म की सबसे पहचानने योग्य तरकीब यहाँ सामने आती है: गाज़ा में बमबारी से अचानक कट करके तेल अवीव की रोशन खिड़कियाँ दिखाना। यह दृश्य पूरी फ़िल्म में बार-बार लौटता है और आम इज़राइली जीवन को उदासीनता के सबूत में बदल देता है।

### 11. आवाज़ में गाज़ा, पर्दे पर तेल अवीव

सैनिक बड़े दायरे में फैले “एक पूरे मोहल्ले” पर बमबारी का वर्णन करता है। फिर ख़ामोशी और नाटकीय संगीत के बीच कैमरा तेल अवीव के घरों में झाँकता है: रिमोट लिए एक आदमी, सोफ़े पर बैठे लोग।

- **संवेदी छवियों के गुण बदलना.** दर्शक का मन गाज़ा की दूर से दिखाई गई, बेरंग और व्यापक तस्वीरों से तेल अवीव के बैठकख़ानों की नज़दीकी, निजी और रंगीन तस्वीरों की ओर चला जाता है।
- **दो छवियों की संयुक्त छाप.** शब्दों में एक इमारत के उड़ाए जाने का वर्णन है, जबकि आँखों के सामने तेल अवीव की रोशन इमारत है। इज़राइली दर्शक अपने ही बैठकख़ाने में ख़तरा महसूस करता है; विदेशी दर्शक यह संदेश ग्रहण करता है कि इज़राइली पास के मोहल्लों को मिटाते हुए भी शांत और आरामदेह जीवन जीते हैं।

### 12. पहचान का जाल

सैनिक ख़ुद को उस काम से अलग दिखाने की कोशिश करता है: “एक वक़्त के बाद मुझसे और नहीं हुआ… मैं इसमें हिस्सा नहीं ले सकता।”

> **साक्षात्कारकर्ता:** लेकिन तुमने इसमें हिस्सा लिया था।
>
> **सैनिक:** क्या?
>
> **साक्षात्कारकर्ता:** लेकिन तुम तो इसमें पहले ही हिस्सा ले चुके हो।

- **पहचान से जुड़ा अपराधबोध.** साक्षात्कारकर्ता यह नहीं कहता कि “तुमने ग़लत काम किया” (व्यवहार); उसका आशय है, “अब तुम ऐसे ही इंसान हो” (पहचान)। बदलाव का यह सबसे गहरा स्तर है। उस अपराधबोध से राहत पाने के लिए सैनिक आगे और भी चरम बयान देता है। फिर तेल अवीव की बालकनियों पर एक और कट उस भावनात्मक जुड़ाव को पक्का कर देता है।

### 13. इब्न गबिरोल पर दोपहर का खाना

एक सैनिक कहता है कि हमलों के बीच वह इब्न गबिरोल स्ट्रीट पर खाना खाने या दोस्तों से मिलने चला जाता था।

- **बिना कहे बनाया गया समीकरण.** सेना समेत हर कार्यस्थल पर खाने का विराम लेना सामान्य बात है। लेकिन संपादन दर्शक को एक अनकहे निष्कर्ष तक पहुँचाता है: जो व्यक्ति हैमबर्गर खाकर लौटे और फिर हमले की योजना बनाए, वह मनोरोगी है।
- **ग़ायब संदर्भ.** ये अनिवार्य सैन्य सेवा कर रहे लोग हैं, जो एक जटिल अभियान व्यवस्था में लंबी पालियों में काम करते हैं। दबाव में काम करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए दिनचर्या बनाए रखना ज़रूरी सहारा है।

### 14. बंधक, बालकनियाँ और अभिजात वर्ग

इब्न गबिरोल वाले बयान से फ़िल्म बंधकों के प्रतीक के साथ लिखे “हम सब आपका इंतज़ार कर रहे हैं” पर कट करती है, फिर तेल अवीव के प्रदर्शनों (“उन्हें अब घर लाओ”) और बालकनी में नाचते लोगों पर। सैनिक “सामाजिक अभिजात वर्ग” की बात करता है और कहता है, “वे इसे तुम्हारे सामने बहुत प्रतिष्ठित चीज़ की तरह पेश करते हैं।”

- **बँटी हुई छाप.** उसी शहर में इब्न गबिरोल पर खाना खाने वाले “उदासीन” सैनिक भी हैं और बंधकों के लिए रोती भीड़ भी। इन दृश्यों को साथ रखकर फ़िल्म चुपचाप बंधकों के पोस्टर फाड़ने को उचित ठहराती है और युद्ध अपराधों के आरोप को मज़बूत करती है।
- **भावनात्मक जुड़ावों की टक्कर.** प्रदर्शन का शोर भावनाएँ उभारता है; उसके तुरंत बाद बालकनी में नाचते लोग दिखते हैं। दो तीव्र भावनात्मक छवियों की यह टक्कर घृणा पैदा करती है: इज़राइली अपने बंधकों के लिए रोते हैं, फिर भी नाचते और खाते हैं जबकि उनकी सेना गाज़ा को मिटा रही है। आघात की छाया में जी रहे समाज को नैतिक रूप से संवेदनहीन दिखाया जाता है।
- **वर्गीय पहचान की ओर छलाँग.** रेस्तराँ में खाने को “अभिजात वर्ग”, “मध्य-वाम” और “ऊँची सामाजिक-आर्थिक हैसियत” से जोड़ दिया जाता है। सैन्य कार्रवाई को एक तृप्त और कटे हुए वर्ग की उपज दिखाया जाता है। इसमें दुनिया पर नियंत्रण रखने वाले अभिजात वर्ग के रूप में यहूदियों को चित्रित करने वाली पुरानी मिथ्या धारणा की गूँज है।
- **किसी का नाम नहीं लिया जाता.** “वे इसे तुम्हारे सामने पेश करते हैं”: ये “वे” कौन हैं? कर्ता को ग़ायब रखने से एक अदृश्य, चालाक शक्ति का आभास बनता है। यह खुला सवाल दर्शक को फ़िल्म के अंत में दिए जाने वाले जवाब को स्वीकार करने के लिए तैयार रखता है।

## 5. इतिहास और मिटा दिया जाना

> हमने रिकॉर्ड बना दिया। आठ मिनट में एक घर में आग लगा दी।
>
> एक सैनिक की आवाज़, जबकि कैमरा ट्रेडमिल पर दौड़ती महिला को दिखाता है

फ़िल्म 1948 की घटनाओं को वर्तमान में समेट लाती है, इज़राइली टेलीविज़न की विश्वसनीयता का सहारा लेती है और घरों को जलाने की गवाही के सामने शांत नागरिक जीवन के दृश्य रखती है। उसके सवाल ऐसे गढ़े गए हैं कि ज़रूरत के मुताबिक़ जवाब मिलें।

### 15. समयरेखा को समेट देना

1920 में रेत से उभरता तेल अवीव, फिर 1940, और फिर पर्दे पर लिखा आता है: “गाज़ा और तेल अवीव के बीच सिर्फ़ 60 km की दूरी है… गाज़ा के निवासी उन गाँवों से आए थे जिन्हें 1948 में उजाड़ दिया गया था।”

- **छिपा हुआ संकेत.** संपादन 1920 और आज के बीच एक रिश्ता बनाता है। तेल अवीव के एक आधुनिक पार्क को 1948 की घटनाओं से जोड़ दिया जाता है और दर्शक इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि तेल अवीव गाज़ा के खंडहरों पर बना है।

### 16. ट्रैक्टर और ड्रोन

कैमरा तेल अवीव में अकेले खड़े एक पुराने घर पर ज़ूम करता है, फिर इमारतें गिराते ट्रैक्टर के श्वेत-श्याम फ़ुटेज पर कट करता है और उसके बाद एक सैनिक को दिखाता है, जो कहता है कि इज़राइल रक्षा बल गाज़ा में घरों को ज़मीन से मिला देता है।

- **छवियों के मेल से भावनात्मक जुड़ाव.** इतिहास का ट्रैक्टर और आज का ड्रोन एक ही छवि बन जाते हैं। आज की लड़ाई को 1948 की कथा से जुड़ी भावनाओं पर चिपका दिया जाता है।

### 17. सफ़ाई की भाषा

सैनिक “समतल करना”, “पट्टियों में काम किया”, “उन्हें साफ़ करना” और “क्या तुम्हें यह साफ़ दिखता है?” जैसे शब्द इस्तेमाल करता है।

- **निष्प्राण शब्दों में पेश करना.** सफ़ाई से जुड़े शब्द बोलने वाले को कार्रवाई से भावनात्मक दूरी देते हैं, लेकिन सुनने वाले की नज़र में उसे अमानवीय बना देते हैं। भूमिगत आतंकी ढाँचे के ख़िलाफ़ कार्रवाई को शुद्धिकरण के रूप में पेश किया जाता है, जिसे दर्शक जातीय सफ़ाए के रूप में सुनता है।

### 18. गवाह के रूप में इज़राइली टेलीविज़न

एक खिड़की से इज़राइली समाचार प्रसारण दिखता है, जिस पर लिखा है “7/10 को 367 दिन”। संवाददाता कहता है कि इज़राइल रक्षा बल इलाक़े को “समतल करने” के लिए कार्रवाई कर रहा है, ताकि निवासियों के लौटने के लिए कोई जगह न बचे।

- **प्रामाणिकता का सहारा.** जिस क्षण दर्शक को लग सकता है कि गुमनाम सैनिक बढ़ा-चढ़ाकर बोल रहा है, फ़िल्म दिन के उजाले में एक आधिकारिक इज़राइली आवाज़ सामने ले आती है। संकेत यह बनता है: इज़राइल का अपना मीडिया भी इसे स्वीकार करता है।

### 19. जलते घर और ट्रेडमिल

आवाज़ में सुनाई देता है: आबादी उत्तर से दक्षिण चली गई, घरों को जैतून के तेल और सोफ़े के कुशन से जलाया गया, और फिर शेख़ी भरा वाक्य, “हमने रिकॉर्ड बना दिया, आठ मिनट।” पर्दे पर: खिड़की के पीछे ट्रेडमिल पर दौड़ती एक महिला।

- **इंद्रियों के अनुभव में विरोध.** आँखों को शांत, स्वस्थ रोज़मर्रा का जीवन दिखता है, जबकि कानों में आगज़नी की बात पड़ती है। मन वे तस्वीरें ख़ुद बना लेता है जिन्हें फ़िल्म नहीं दिखाती, और उस महिला का दौड़ना उदासीनता की तस्वीर बन जाता है।
- **जवाब की दिशा तय करने वाला सवाल.** साक्षात्कारकर्ता पूछता है, “किसी घर को जलाते कैसे हैं?”, यह नहीं कि “क्यों?” या “क्या वहाँ कोई सुरंग या ख़तरा था?” सवाल सैनिक को इस काम को गर्व करने लायक हुनर की तरह पेश करने के लिए उकसाता है। इसका मक़सद जले हुए सबूतों का संकेत देना, या शवदाह भट्टियों से समानता सुझाना भी हो सकता है।

### 20. रंगीन खानों में बदलते परिवार

सैनिक मोहल्लों का एक ग्रिड बनाता है और उसमें लोगों के रहने का प्रतिशत दिखाता है: “25% आबादी… हरा, पीला, लाल, बैंगनी 300% पर।” एक “हरी” इमारत पर पाँच से दस मिनट के भीतर हमला होता है।

- **इजाज़त देने वाला एल्गोरिदम.** दर्शक एक ऐसी धारणा अपना लेता है जिसकी कभी जाँच नहीं होती: यह व्यवस्था जान बचाने के लिए नहीं, बल्कि भीतर मौजूद लोगों पर इमारतें गिराने की इजाज़त देने के लिए है। परिवार खेल के बोर्ड पर रंगीन निशान बन जाते हैं।

### 21. “उनकी क़िस्मत अच्छी हो”

लगातार पूछे गए सवाल नैतिक जाल को पूरा करते हैं।

> **साक्षात्कारकर्ता:** और उनका नज़रिया क्या है? हमने लोगों को जगह खाली करने को कहा था; जो रुका, वह उसकी अपनी समस्या है?
>
> **साक्षात्कारकर्ता:** जो लोग जगह खाली नहीं कर सकते, उनका क्या? दिव्यांग लोग, डरे हुए लोग…?
>
> **सैनिक:** उनकी क़िस्मत अच्छी हो!

- **छिपी हुई धारणा और जाल.** पहले सवाल में एक धारणा पहले से रख दी जाती है; दूसरा सवाल भावनात्मक जाल बिछाता है। सैनिक के जवाब के बाद छाई ख़ामोशी क्रूरता की छाप छोड़ती है। चेतावनियाँ, मानवीय सहायता के गलियारे और आबादी को सुरक्षित निकालने की व्यावहारिक चुनौतियाँ ग़ायब हो जाती हैं, या उन्हें किसी अपराध पर पर्दा डालने का ज़रिया बना दिया जाता है।

## 6. शव और आँकड़े

> ‘हथियारबंद’ शब्द भूल जाइए। उससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। हथियारबंद लोग मैंने बस एक बार देखे थे।
>
> एक सैनिक, इससे पहले कि साक्षात्कारकर्ता पूछे कि मारे गए दर्जनों लोग कौन थे

तेल अवीव में क्रेनें ऊपर उठ रही हैं, जबकि गाज़ा में शव गिने जा रहे हैं। इस हिस्से में फ़िल्म आतंकवादी की परिभाषा बदलती है, कुत्तों के लिए छोड़े गए शवों और सामूहिक कब्रों का वर्णन करती है, और सैनिक को मशीन के एक तकनीकी पुर्ज़े की तरह पेश करती है।

### 22. तेल अवीव बनता है, गाज़ा मिटता है

तबाही के आँकड़ों से दृश्य तेल अवीव की निर्माण स्थलों पर पहुँचता है: वेल्डिंग करते मज़दूर, क्रेनें और व्यस्त सड़कें। ध्वनि में दिल की धड़कन सुनाई देती है।

- **विरोधी ध्रुव.** गाज़ा धूल में बदल रहा है; तेल अवीव बढ़ रहा है। दर्शक को गहरे अन्याय का संदेश मिलता है, और बढ़ती भावुकता अगला संदेश उसके मन में बैठाना आसान बना देती है।

### 23. आतंकवादी कौन है

सैनिक कहता है: “उस क्षेत्र में मरा हुआ आतंकवादी वह है जिसे आपने मारने का फ़ैसला किया… 140 लोग, उनमें से किसी ने कभी हथियार नहीं उठाया था।”

- **पूर्ण परिभाषा.** फ़िल्म यह समीकरण बनाती है कि “आतंकवादी यानी जिसे भी मारा गया”, जिससे ऐसा लगता है कि इज़राइल गाज़ा के हर निवासी को, महिलाओं और बच्चों समेत, आतंकवादी मानता है।
- **हटाया गया संदर्भ.** गायब हैं: मैदानी पर्यवेक्षकों की चेतावनियाँ, विस्फोटक बिछाते देखे गए आतंकवादी, और नागरिक कपड़ों में घात लगाकर हमलों का निर्देशन करते तथा आबादी में घुलमिल जाते हमास के आतंकवादी। दर्शक को केवल कपड़ा बटोरता एक आदमी दिखता है और वह निष्कर्ष निकालता है कि हत्या मनमाने ढंग से हुई।

### 24. शव और कुत्ते

फ़िल्म कहती है कि शव उठाए नहीं जाते और कुत्ते उन्हें खा जाते हैं।

> **सैनिक:** शव उठाना, वे उठाते नहीं हैं… कुत्ते उन्हें खा जाते हैं।
>
> **साक्षात्कारकर्ता:** तुमने ऐसा देखा है?
>
> **सैनिक:** मैं देख नहीं पाया… मेरे आसपास के लोगों ने देखा था।

- **सुनी-सुनाई बात को तथ्य की तरह बैठाना.** सैनिक मानता है कि उसने यह कभी नहीं देखा (“मैं कभी इसे देखने के लिए बैठा ही नहीं”)। फिर भी उसके शब्द घृणा पैदा करने वाला दृश्य रचते हैं, जो घटना को बर्बरता की पराकाष्ठा के रूप में पेश करता है। संदेश यह है: आईडीएफ गाज़ा के लोगों को मारता ही नहीं, उनके शव कुत्तों के लिए भी छोड़ देता है।

### 25. “मेरी भूमिका तकनीकी है”

जब उससे पूछा जाता है कि क्या उसने दूसरों से यह सब न देखने को कहने के बारे में सोचा था, तो सैनिक जवाब देता है: “मेरी भूमिका तकनीकी है। मुझे सिद्धांत या नैतिकता के आधार पर कोई राय नहीं देनी चाहिए।”

- **बुराई की साधारणता.** सैनिक ख़ुद को विवेक रखने वाले इंसान से घटाकर मशीन का पुर्ज़ा बना देता है। दर्शक को युद्ध अपराधियों का जाना-पहचाना बचाव सुनाई देता है—“मैंने तो बस आदेश माने थे”—और उस इकाई के सैनिक अस्तित्व के लिए लड़े जा रहे युद्ध में कठिन दुविधाओं का सामना करने वाले लोगों के बजाय रोबोट बन जाते हैं।

### 26. बढ़ती मंज़िलें, बढ़ते शव

कैमरा तेल अवीव में बन रही एक इमारत की मंज़िलों के नंबरों (64, 65… 72) का पीछा करता है, फिर गाज़ा में गड्ढों के भीतर ढेर लगे शवों की गवाही पर कट करता है।

- **दो दृश्य संकेतों का विलय.** तेल अवीव की ऊँचाई और गाज़ा में “लगातार जमा होते” शवों को साथ रखा जाता है, जब तक दोनों छवियाँ एक न हो जाएँ: तेल अवीव की तरक़्क़ी ऐसी दिखाई जाती है मानो वह मारे गए लोगों पर निर्भर हो।

### 27. “सैकड़ों, सैकड़ों, सैकड़ों”

“‘हथियारबंद’ शब्द भूल जाइए, उससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता… हथियारबंद लोग मैंने बस एक बार देखे थे।” साक्षात्कारकर्ता पूछता है: “तो ये दर्जनों लोग कौन हैं?” सैनिक संख्या बढ़ाकर कहता है: “सैकड़ों, सैकड़ों, सैकड़ों!”

- **सर्वव्यापी दावा.** एक निरपेक्ष बयान मुठभेड़ के नियमों, शहरी युद्ध और सड़कों पर मौजूद हज़ारों हथियारबंद आतंकवादियों को चर्चा से हटा देता है। यह शुरुआती कथन मन में यह निष्कर्ष बैठाता है कि आतंकवादी और नागरिक में कोई भेद किए बिना लोगों का अंधाधुंध सफ़ाया किया जा रहा है।

### 28. बिना फ़ुटेज वाली सामूहिक कब्रें

ड्रोन से दिखने वाले दृश्य के आधार पर सैनिक बताता है: “सामूहिक कब्रें… बारिश के पानी से भरी कब्रें… वह कब्र नहीं, शवों का गड्ढा है… पूरा गाज़ा, शव ही शव।”

- **घृणा के सहारे छवि मन में बैठाना.** फ़िल्म कोई दस्तावेज़ी प्रमाण नहीं देती—न अपना, न गाज़ा के स्रोतों का। केवल एक ऐसे व्यक्ति के शब्द हैं जिसे सैनिक के रूप में पेश किया गया है। घृणा उन सवालों को दबा देती है जो दर्शक को पूछने चाहिए: क्या यह हमास द्वारा किया गया अस्थायी दफ़न था, या ड्रोन फ़ुटेज को गलत समझा गया? “उन्हें मारा क्यों?” “मुझे नहीं पता”—यह बातचीत निरर्थक क्रूरता की छवि को पक्का कर देती है।

## 7. पुल और सहायता की कतारें

> बस एक के ऊपर एक?
>
> साक्षात्कारकर्ता, पुल और उससे गिरती आकृतियों के चित्र पर सैनिक के शब्द दोहराते हुए

किर्या बार-बार एक दृश्य संकेत के रूप में लौटता है। आम लोगों के घरों की बालकनियों के दृश्यों पर प्रधानमंत्री की आवाज़ सुनाई देती है, और पुल तथा उससे गिरती आकृतियों का चित्र गोली चलाने के निशानों जैसा बन जाता है। यहाँ कथा भौतिक यथार्थ से टकराती है।

### 29. किर्या

कैमरा बार-बार रात के समय तेल अवीव के एक व्यस्त नागरिक इलाके में स्थित आईडीएफ के मुख्यालय, किर्या, पर लौटता है।

- **दोहराव से अर्थ बदलना.** अलग-अलग संदर्भों में एक ही दृश्य दोहराने से उसका अर्थ बदल जाता है। एक संप्रभु देश का वैध रक्षा मुख्यालय नागरिकों के बीच छिपा सैन्य अड्डा बन जाता है। दर्शक को इस निष्कर्ष की ओर ले जाया जाता है कि इज़राइल और हमास में कोई नैतिक अंतर नहीं है—यानी “मानव ढाल” के अर्थ को पूरी तरह उलट दिया जाता है।

### 30. भाषण और समाचार रिपोर्ट

सामान के प्रवेश को रोकने पर बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण के साथ समाचार प्रस्तोता योनित लेवी की “स्वैच्छिक पलायन को बढ़ावा देने” संबंधी रिपोर्ट जोड़ी जाती है। ये आवाज़ें तेल अवीव की रोशन बालकनियों के दृश्यों पर सुनाई देती हैं। एक आदमी अपने बैठकखाने में टहलता है; सैनिक जब “पट्टी की सफ़ाई” की बात करता है, तो एक शटर बंद हो जाता है।

- **उद्देश्य को हटाना.** सुरक्षा का संदर्भ—आपूर्ति को हमास तक पहुँचने से रोकना—छोड़ दिया जाता है। चुपचाप ये बातें सुनते शांत निवासियों को भुखमरी और विस्थापन में साझेदार के रूप में पेश किया जाता है, और उनकी चुप्पी को सहमति माना जाता है।

### 31. एक के ऊपर एक शव

सैनिक और साक्षात्कारकर्ता एक जैसी हाथ की हरकतों से नोटबुक में पुल और उससे गिरती आकृतियाँ बनाते हैं। 26:24 पर सैनिक कहता है कि शव “एक के ऊपर एक ढेर होते जाते हैं”। साक्षात्कारकर्ता दोहराता है: “बस एक के ऊपर एक?” सैनिक सिर हिलाता है।

- **जहाँ कथा भौतिक यथार्थ से टकराती है.** दूर से तेज़ भागते लोगों पर गोली चलने पर शव एक साफ़-सुथरे ढेर में नहीं गिर सकते। कोई व्यक्ति कैसे गिरेगा, यह उसके वज़न, रफ़्तार और कोण पर निर्भर करता है; लोग आँख मूँदकर मरने के लिए एक ही जगह नहीं दौड़ते। पीछे बैठकर स्क्रीनें देखने वाला सैनिक हक़ीक़त पर फ़िल्म या कंप्यूटर गेम की छवि थोप रहा है। यह सदमा पहुँचाने के लिए गढ़ी गई बयानबाज़ी की अतिशयोक्ति है, तथ्यपरक गवाही नहीं।
- **लंबे समय तक दिखाया गया दृश्य संकेत.** कैमरा काफ़ी देर तक चित्र पर ठहरा रहता है। इस तरह जब अविश्वसनीय आँकड़े सामने आते हैं, तब तक गोली चलाने के निशानों जैसी छवि दर्शक की याद में बैठ चुकी होती है।

## 8. होलोकॉस्ट का संदर्भ

> कुछ लोग आतंकवाद को रोकते हैं, और कुछ लोग शांति को रोकते हैं।
>
> अपने खुफिया विभाग का वर्णन करता एक सैनिक

अपने अंतिम हिस्से में फ़िल्म इज़राइली समाज की तुलना नाज़ी जर्मनी से करती है, सैनिक से जनसंहार की बात कहलवाती है और आज के गाज़ा के इर्द-गिर्द होलोकॉस्ट के प्रतीक सजाती है। अंत में वह नेतन्याहू की दी हुई आतंकवाद की परिभाषा को ही इज़राइल के विरुद्ध इस्तेमाल करती है।

### 32. पोलैंड और जर्मनी

सैनिक आज की स्थिति की तुलना पोलैंड की अपनी स्कूल यात्रा और नाज़ी जर्मनी से करता है: “मुझे उन नाज़ियों में बहुत बुराई दिखती है, तो फिर मैं अपने बारे में क्या कहूँ?”

- **ऐतिहासिक पहचान की ओर छलाँग.** नाज़ी शासन के बीच जी रही जर्मन जनता को उस व्यक्ति के बराबर रख दिया जाता है जो बमबारी करके घर लौटता है और मनोविज्ञान की डिग्री की चिंता करता है। वास्तविक संदर्भ गायब हो जाता है: नरसंहार को अंजाम देने वाले एक आतंकवादी संगठन के विरुद्ध रक्षात्मक युद्ध।

### 33. “उनका गला घोंटो”

साक्षात्कारकर्ता पूछता है, “इससे उन्हें ज़िंदा रहने में कैसे मदद मिलती है?” और “लेकिन वे दुश्मन हैं, ये लोग दुश्मन हैं?” सैनिक बार-बार कहता है, “उनका गला घोंटो, उनका गला घोंटो, उनका गला घोंटो,” और अंत में कहता है: “आख़िर में यही लगता है कि यही करना पड़ेगा।”

- **प्रश्नों में छिपी पूर्वधारणा.** छिपी हुई मान्यताओं पर टिके प्रश्न सैनिक को उस तुलना से पीछे हटने नहीं देते और किसी सामरिक या खुफिया स्पष्टीकरण की गुंजाइश नहीं छोड़ते। दर्शक के मन में केवल उकसाने वाले शब्द रह जाते हैं।
- **समग्र प्रभाव.** अभियान कक्ष से एक भयावह ऐतिहासिक पहचान तक की यात्रा, जिसके बरक्स शांत बालकनियाँ दिखाई जाती हैं, फ़िल्म एक ही निष्कर्ष स्थापित करती है: इज़राइली समाज अपनी मानवता खो चुका है। इसका प्रभाव इज़राइल और दुनिया भर में यहूदियों के प्रति नफ़रत को उचित ठहराने का है।

### 34. “हम साथ मिलकर जीतेंगे”

तेल अवीव की एक इमारत पर लगा रोशन बोर्ड, जो इज़राइली झंडे के पास धीरे-धीरे साफ़ दिखाई देने लगता है।

- **दृश्य का धीरे-धीरे खुलना.** धुँधली तस्वीर को पढ़ने की कोशिश दर्शक का ध्यान बाँधे रखती है। जब तस्वीर साफ़ होती है, तो सैनिक की अगली बातों के संदर्भ में एकजुटता का प्रतीक साझा अपराधबोध के प्रमाण की तरह ग्रहण किया जाता है।

### 35. रोशनी और अँधेरा

पूरी फ़िल्म में साक्षात्कारकर्ता का चेहरा रोशनी में साफ़ दिखता है; सैनिक हमेशा अँधेरे में रहता है।

- **दृश्य असमानता.** रोशनी में बैठा व्यक्ति जाँचकर्ता और सत्य का प्रतिनिधि लगता है; छाया में बैठा व्यक्ति अपराध स्वीकार करता हुआ आदमी लगता है। आईडीएफ अँधेरे में है।

### 36. जनसंहार शब्द

मुख्य बातचीत।

> **साक्षात्कारकर्ता:** तुम्हें नहीं लगता कि यह जनसंहार है?
>
> **सैनिक:** हाँ! सच में।
>
> **सैनिक:** जानबूझकर गोलीबारी की जाती है, जानबूझकर! जानबूझकर!… तुम इन बच्चों को मारना चाहते थे।

- **चरम आरोप तक पहुँचना.** युद्ध में नागरिकों को होने वाली क्षति को जानबूझकर बच्चों की हत्या के बराबर रख दिया जाता है। आत्मरक्षा, सशस्त्र आतंकवाद और लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास हटा दिए जाते हैं, और सबसे गंभीर कानूनी शब्द सीधे दर्शक की भावनाओं से जोड़ दिया जाता है।

### 37. “मज़ा आता है”

जब उससे पूछा जाता है कि निर्णायक मोड़ कब आया, सैनिक कहता है: “हार्मोन सिर पर चढ़ जाते हैं और तुम्हें मज़ा आता है… सुख की पागल कर देने वाली अनुभूति होती है… मज़ा आता है!”

- **पहचान पर प्रहार.** दबाव में किए गए व्यवहार को पीड़ा में आनंद लेने वाली पहचान बना दिया जाता है। हत्या के वर्णन के साथ “मज़ा” जोड़ने से सैनिकों के प्रति सहानुभूति की कोई गुंजाइश नहीं बचती।

### 38. सायरन और रेलगाड़ी

तेल अवीव में स्मृति दिवस का सायरन और सड़क पर ठिठके लोग; फिर तेल अवीव सिनेमाथेक का दृश्य, जिस पर लिखा है “क्लोद लांज़मान को श्रद्धांजलि”—शोआ के निर्देशक; एक रेल इंजन, पटरियाँ और चिमनी से उठता धुआँ; नेतन्याहू का होलोकॉस्ट को याद करना; योनित लेवी का भुखमरी और मानवता के विरुद्ध अपराधों के अंतरराष्ट्रीय आरोप पढ़ना।

- **अलग-अलग कालखंडों को एक करना.** यह फ़िल्म का सबसे सधे हुए ढंग से किया गया दृश्य परिवर्तन है। होलोकॉस्ट की स्मृति से जुड़ी हर आवाज़ और छवि को आज के गाज़ा और अंतरराष्ट्रीय गिरफ़्तारी वारंटों से जोड़ दिया जाता है। यहूदी राज्य पर उसी के होलोकॉस्ट प्रतीकों के सहारे होलोकॉस्ट को अंजाम देने का आरोप लगाया जाता है।

### 39. “बीबी का विभाग”

सैनिक एक ऐसे विभाग का वर्णन करता है जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर सक्रिय लोगों पर नज़र रखता है, “गंदगी” निकालकर हेग में दायर याचिकाओं को विफल करता है और प्रधानमंत्री के लिए खुफिया जानकारी जुटाता है: “बीबी का लक्ष्य, सबसे बड़ा लक्ष्य, फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना रोकना है।”

- **अतिसामान्यीकरण.** इज़राइल के कानूनी और कूटनीतिक बचाव को मिटा दिया जाता है, और उसकी खुफिया व्यवस्था को शांति विफल करने के लिए बनी एक निजी राजनीतिक शाखा के रूप में पेश किया जाता है। यह नहीं बताया जाता कि गाज़ा ने हमास को चुना, जिसने नरसंहार किया, और इज़राइल की स्थापना के बाद से अरब पक्ष ने शांति के हर अवसर को ठुकराया।

### 40. आतंकवाद की परिभाषा

एक पुराने साक्षात्कार में युवा नेतन्याहू अपनी किताब से आतंकवाद की परिभाषा देते हैं: “राजनीतिक उद्देश्यों के लिए निर्दोष लोगों पर जानबूझकर और योजनाबद्ध हमला, उनकी हत्या, उन्हें अपंग बनाना और धमकाना।” फिर कपड़े टाँगता एक आदमी, बंद होता शटर और शुक्रवार की शाम बच्चों की मौजूदगी वाले घरों पर हमले की गवाही दिखाई जाती है।

- **समीकरण को उलट देना.** परिभाषा इस तरह रखी जाती है कि उसके बाद की गवाही इज़राइल पर पूरी तरह लागू होती दिखे। नेता के अपने शब्दों को उनके और उनके देश के विरुद्ध जाल बना दिया जाता है।

## 9. अंत

> गाज़ा में फ़िलिस्तीनी नागरिकों की इज़राइल द्वारा हत्या जारी है।
>
> फ़िल्म का अंतिम स्क्रीन संदेश

फ़िल्म अपने रचे हुए सबसे तीखे विरोधाभास पर समाप्त होती है: तेल अवीव की शांत रातों से गाज़ा के मलबे में अपने बेटे को खोजने के लिए खुदाई करते एक पिता तक।

### 41. फ़ोन पर आवाज़ें

नोटबुक में चित्र बनाते हुए (“होमलैंड” सॉफ़्टवेयर), सैनिक मलबे में फँसे लोगों के रिश्तेदारों की सुनी गई फ़ोन कॉल याद करता है: “मैंने उनकी आवाज़ें सुनीं… रो रहे थे… चीख रहे थे… मेरी माँ मर गई है और बच्चे…”

- **आवाज़ों की भावनात्मक छाप.** चीखने और रोने की आवाज़ें आलोचनात्मक सोच से परे, सीधे श्रोता की भावनाओं पर असर करती हैं। एकरस चित्र बनाना (“एक कॉल, एक कॉल, एक कॉल”) अपराधबोध को अवचेतन में उतारता है। और यहाँ भी बात सुनी-सुनाई है।

### 42. तेल अवीव जीता है, गाज़ा मरता है

अक्टूबर और नवंबर 2023 में गाज़ा की तबाही के दृश्य। एक आदमी घुटनों के बल बैठा मलबे में दबे अपने बेटे सईद को पुकारता है, हथौड़े से मलबा तोड़ता है और रोता है। मलबे के नीचे बच्चों के पैर। फीका आसमान, ऊपर से गुज़रते विमान और फ़िल्म का अंतिम स्क्रीन संदेश।

- **अंतिम विरोधाभास.** एक घंटे तक तेल अवीव की शांत रातें दिखाने के बाद—सजाया जाता सोफ़ा, दौड़ती महिला, एक-दूसरे के घुटनों की मालिश करता जोड़ा—फ़िल्म इसका उलटा दृश्य सामने रखती है। अंतिम स्क्रीन संदेश इसे वर्तमान से जोड़ता है, और दर्शक को पूरे इज़राइली समाज को जारी अपराध में भागीदार मानने की ओर ले जाता है।

## फ़िल्म क्या नहीं दिखाती

फ़िल्म के भावनात्मक असर के बावजूद, उसके सबूतों में स्पष्ट कमियाँ हैं।

- **आँखों देखा नहीं, सुनी-सुनाई बात.** “Homeland” सॉफ़्टवेयर के ज़रिए और भोजन वितरण के दौरान हुई हत्याओं के बारे में गवाही देने वाला सैनिक ख़ुद कहता है: “मुझे ठीक-ठीक नहीं पता… मैंने उनकी आवाज़ें सुनी थीं… मैं वहाँ कैमरों पर नहीं था… मैंने कभी बैठकर किसी भी चरण की रिकॉर्डिंग नहीं देखी।”
- **सच के साथ अतिशयोक्ति.** वास्तविक जानकारी—हमले और हमास के उन ठिकानों का विनाश जिनमें आम नागरिकों को गंभीर नुकसान पहुँचा—फ़िल्मी रूपकों और राजनीतिक-कानूनी आरोपों (“शांति को विफल करना”, “नरसंहार”, “लाशों के ढेर”) के साथ मिला दी जाती है। स्तब्ध करने वाले दृश्यों और दावों की बाढ़ दर्शक को कहानियों की कमियाँ देखे बिना आख़िरी कैप्शन को अंतिम फ़ैसला मान लेने की ओर ले जाती है।
- **पर्दे पर कौन दिखता है.** महिलाएँ, बच्चे और बुज़ुर्ग लगभग कभी दिखाई नहीं देते। ग़ज़ा की उजड़ी सड़कों पर मुख्यतः पुरुष और किशोर लड़के दिखते हैं।
- **शवों का एक दृश्य.** अपने तमाम दावों के बावजूद, फ़िल्म में मलबे के नीचे शवों का एक ही दृश्य है: गिरी हुई दीवार के नीचे से निकले लगभग दस लोगों के पैर। पूरे युद्ध के दौरान ग़ज़ा की तस्वीरें हर जगह प्रसारित और पोस्ट की गईं, जिनमें स्तब्ध करने के लिए बनाई गई नक़ली तस्वीरें भी थीं। फ़िल्म ऐसा कोई तुलनीय दृश्य पेश नहीं करती।
- **एक-दूसरे पर गिरते शवों का दावा.** दूर से गोली लगने पर लोगों के “एक-दूसरे के ऊपर” गिरने का वर्णन गोली की गति और मानव व्यवहार के नियमों से मेल नहीं खाता। यहीं फ़िल्म की कहानी अविश्वसनीय हो जाती है।

## निष्कर्ष

NAZA निष्पक्ष दस्तावेज़ नहीं, बल्कि सोच-समझकर बनाई गई प्रचार सामग्री है। फ़िल्म की रिलीज़, सीमित दर्शकों के लिए हुए प्रदर्शन और उसे देखने का कोई रास्ता उपलब्ध न होने के बावजूद व्यापक कवरेज ने एक खाली जगह छोड़ी, जिसे दर्शकों ने डर और किसी छिपे सच तक पहुँचने के एहसास से भर दिया।

फ़िल्म के भीतर चालीस से अधिक दृश्य हैं और हर दृश्य प्रभाव डालने की कोई न कोई तकनीक इस्तेमाल करता है: सम्मोहक भाषा, हटाया गया संदर्भ, बात को नए अर्थ में पेश करना, ग़ज़ा में बमबारी के वर्णन के बरक्स तेल अवीव की रोशन बालकनियाँ दिखाना, घटनाओं के क्रम को समेट देना और होलोकॉस्ट से तुलना दर्शकों के मन में बैठाना। ये सब एक ही निष्कर्ष की ओर ले जाते हैं: इज़राइल जनसंहार कर रहा है।

साथ ही साक्ष्य में गंभीर कमियाँ हैं: सुनी-सुनाई बातों को तथ्य की तरह पेश किया गया है, दृश्य प्रमाण नहीं हैं, महिलाओं और बच्चों को फ़्रेम से बाहर रखा गया है, और शवों का एक ऐसा ढेर है जो भौतिक रूप से असंभव है—यहीं फ़िल्म की कथा बिखर जाती है।

## स्रोत

वे सभी लेख, बयान और पोस्ट जिन पर यह पृष्ठ आधारित है, सबसे पुराने से शुरू करके। शीर्षक उनकी मूल भाषा में दिए गए हैं।

- Deadline, Zac Ntim: [Former Israeli Prime Minister Takes Aim At Yuval Abraham And Rachel Szor's 'NAZA'](https://deadline.com/2026/09/naftali-bennett-yuval-abraham-rachel-szor-naza-1237098766/) (2026-09-11)
- X · Israel Defense Forces: [IDF first response to NAZA after Venice premiere](https://x.com/IDF/status/2098399911750389869) (2026-09-11)
- Quotidiano.net, Manuela Santacatterina: [Cos'è Naza, il film che svela l’orrore a Gaza](https://www.quotidiano.net/magazine/cinema-serie-tv/naza-il-film-che-svela-orrore-a-gaza-17e8cd10) (2026-09-12)
- Israel News Pulse, Jonathan Mimouni: [NAZA Fact Check: The Claims the Documentary Cannot Prove](https://israelnewspulse.com/naza-fact-checked/) (2026-09-13)
- X · Andrew Fox: [Reply to jury president's Zone of Interest comparison](https://x.com/Mr_Andrew_Fox/status/2099212319527956991) (2026-09-13)
- X · Avigdor Liberman: [X post on NAZA directors](https://x.com/AvigdorLiberman/status/2099077107963851144) (2026-09-13)
- X · Israel Defense Forces: [IDF: 500-civilian approval claim 'completely false'](https://x.com/IDF/status/2099241925848994269) (2026-09-13)
- Al-Monitor, Reuters / Maayan Lubell: [Netanyahu says Gaza documentary 'NAZA' is 'shocking incitement'](https://www.al-monitor.com/originals/2026/09/netanyahu-says-gaza-documentary-naza-shocking-incitement) (2026-09-14)
- Elder of Ziyon, Elder of Ziyon (pseudonymous blogger): [What We Know About the NAZA Movie Already Discredits It](https://elderofziyon.substack.com/p/what-we-know-about-the-naza-movie) (2026-09-14)
- Haaretz, Raviv Drucker: [צפיתי בסרט נז"א. זה היה קשה מאוד, הזדעזעתי, אבל](https://www.haaretz.co.il/opinions/2026-09-14/ty-article-opinion/.highlight/000001a0-9b2e-dfa9-ada3-db6e79a80000) (2026-09-14)
- Il Foglio, Pierluigi Battista: [How ‘Fauda’ responds to ‘Naza’](https://www.ilfoglio.it/en/television/2026/09/14/news/how-fauda-responds-to-naza--407498) (2026-09-14)
- Israel Hayom, Amnon Lord: [הטעות שלישראל אסור לעשות עם הסרט נז"א](https://www.israelhayom.co.il/news/geopolitics/article/21418733) (2026-09-14)
- Israel Hayom: [הקצין באמ"ן מסביר את השקרים בסרט נז"א](https://www.israelhayom.co.il/news/trending-online/article/21422504) (2026-09-14)
- Jüdische Allgemeine, Sabine Brandes: [»Ritualmordlegende« - »Pflicht, Fragen zu stellen«: Israel streitet über »Naza«](https://www.juedische-allgemeine.de/israel/ritualmordlegende-pflicht-fragen-zu-stellen-israel-streitet-ueber-naza/) (2026-09-14)
- Kan News, Eran Sikurel et al.: [הרמטכ"ל נגד הסרט "נז"א": "עלילות דם ועיוות מכוון של המציאות"](https://www.kan.org.il/content/kan-news/defense/1099258/) (2026-09-14)
- X · @MaxNordau (pseudonymous): [Timestamped summary of Raviv Drucker's Channel 13 interview with Yuval Abraham](https://x.com/MaxNordau/status/2099621814276124966) (2026-09-14)
- X · Brig. Gen. Effie Defrin: [IDF Spokesperson asks to view NAZA in full](https://x.com/IDF/status/2099482853423686025) (2026-09-14)
- X · John Spencer: [Collateral damage estimation is what the law requires](https://x.com/SpencerGuard/status/2099562673482658166) (2026-09-14)
- Ynet, Gal Ganot: [הרמטכ"ל יכנס דיון על הסרט נז"א: "לתקוף כדי להרוג 500 אזרחים? שקרי לחלוטין"](https://www.ynet.co.il/news/article/bkapplrtzx) (2026-09-14)
- il Giornale, Fiamma Nirenstein: [Le verità tra film e realtà](https://www.ilgiornale.it/news/politica-internazionale/le-verita-tra-film-e-realta/) (2026-09-14)
- Arutz Sheva: [דרוקר מפתיע: "לא הייתי משדר את זה"](https://www.inn.co.il/news/706333) (2026-09-15)
- HonestReporting, Rachel O'Donoghue: [“NAZA”: A Record Venice Ovation, IDF Condemnation and a Genocide Fabrication](https://honestreporting.com/naza-a-record-venice-ovation-idf-condemnation-and-the-genocide-fabrication/) (2026-09-15)
- Il Riformista, Claudio Velardi: [Le lacrime per Naza e le ore dedicate a Fauda: a Venezia cala il sipario sulla recita, nel mondo arabo sono già all’episodio successivo della serie israeliana](https://www.ilriformista.it/le-lacrime-per-naza-e-le-ore-dedicate-a-fauda-a-venezia-cala-il-sipario-sulla-recita-nel-mondo-arabo-sono-gia-allepisodio-successivo-della-serie-israeliana-530479/) (2026-09-15)
- Israel Hayom, Ariel Bulshtein: [דעה | "נז"א" הוא לא קולנוע – הוא כתב אישום נגד ישראל](https://www.israelhayom.co.il/opinions/article/21429712) (2026-09-15)
- Jewish News, JN Reporter: [New documentary about IDF strikes in Gaza causes anger in Israel](https://www.jewishnews.co.uk/new-documentary-about-idf-strikes-in-gaza-causes-anger-in-israel/) (2026-09-15)
- Moked, Redazione: [Gerusalemme e la risposta tardiva a Naza](https://moked.it/2026/09/15/gerusalemme-e-la-risposta-tardiva-a-naza/) (2026-09-15)
- The Algemeiner: [Former Hamas Hostage Slams ‘NAZA’ Filmmakers for ‘Degrading’ IDF Soldiers ‘Who Fought to Bring Me Home’](https://www.algemeiner.com/2026/09/15/former-hamas-hostage-slams-naza-filmmakers-degrading-idf-soldiers-who-fought-bring-me-home/) (2026-09-15)
- The Jerusalem Post, Corinne Baum: [IDF calls NAZA 500-civilian strike claim 'completely false'](https://www.jpost.com/israel-news/article-908673) (2026-09-15)
- Walla! News, Amir Bohbot: [בצה"ל דוחים את טענות הסרט נז"א - ומבהירים: "שלמים עם התהליכים המבצעיים"](https://news.walla.co.il/item/3868020) (2026-09-15)
- X · Eylon Levy: [X post replying to Raviv Drucker](https://x.com/EylonALevy/status/2099837432141173165) (2026-09-15)
- X · Israel Katz: [X post on Rafah brigade commander strike](https://x.com/Israel_katz/status/2099955776622141611) (2026-09-15)
- X · Israel Ministry of Foreign Affairs: [MFA: NAZA 'pure propaganda'](https://x.com/IsraelMFA/status/2099918779580821690) (2026-09-15)
- Ynet, Itamar Eichner, Tal Amodai: ["נז"א הצית את המדינה": הסרט השנוי במחלוקת בכותרות בעולם - וקו ההגנה של ישראל](https://www.ynet.co.il/news/article/rk4ejmifmx) (2026-09-15)
- Il Foglio, Giulio Meotti: [La Naza dei cieli: storia di un massacro sventato](https://www.ilfoglio.it/esteri/2026/09/16/news/la-naza-dei-cieli-storia-di-un-massacro-sventato--407679) (2026-09-16)
- JNS, Jonathan S. Tobin: [The AI apocalypse and the ‘NAZA’ blood libels against Israel](https://www.jns.org/opinion/column/jonathan-s-tobin/the-ai-apocalypse-and-the-naza-blood-libels-against-israel) (2026-09-16)
- The Free Press, Haviv Rettig Gur: [Hold Your Applause for the New Gaza Documentary](https://www.thefp.com/p/haviv-rettig-gur-naza-israel-gaza-reporting) (2026-09-16)
- X · Prime Minister's Office: [PMO video: How 'Naza' manufactured a case](https://x.com/IsraeliPM/status/2100299036083229142) (2026-09-16)
- Ynet, Itamar Eichner: [ישראל נערכת לקרב בלימה מול היוצרים: "'נז"א' כואב במיוחד כי זה בא מבפנים"](https://www.ynet.co.il/news/article/syyipz00yml) (2026-09-16)
- Channel 14, Ziv Shezo: [נז"א תגיע לאירופה - ובישראל דורשים: קיימו הקרנה מיידית](https://www.c14.co.il/article/1705801) (2026-09-17)
- GB News, Tzipi Hotovely: ['PROPAGANDA!' Israeli ambassador responds to Guardian's Gaza film NAZA amid UPROAR](https://www.youtube.com/watch?v=7XIDAOkFrBU) (2026-09-17)
- Il Foglio, Giulio Meotti: [Se anche Hamas elogia “Naza”](https://www.ilfoglio.it/esteri/2026/09/17/news/se-anche-hamas-elogia-naza--407781) (2026-09-17)
- Israel Hayom, Nissan Strauchler: [התשובה של המומחית הבריטית לסרט נז"א: "מעוותים את דיני המלחמה"](https://www.israelhayom.co.il/news/world-news/europe/article/21448198) (2026-09-17)
- Israel National News, Dr. Avi Perry: [A poisoned lens, a predetermined verdict, and questionable evidence made to fit](https://www.israelnationalnews.com/news/433331) (2026-09-17)
- Jüdische Allgemeine, Sabine Brandes (reporting Itamar Eichner's Ynet interview): [Kampfpilot weist Vorwürfe von »Naza« zurück](https://www.juedische-allgemeine.de/israel/kampfpilot-weist-vorwuerfe-von-naza-zurueck/) (2026-09-17)
- Mena-Watch, Michaela Dudley: [»NAZA«: Israel-Kritik hat ihren »Preis«](https://mena-watch.com/naza-israel-kritik-hat-ihren-preis/) (2026-09-17)
- Misgav Institute for National Security & Zionist Strategy, Prof. Kobi Michael: [The Film "NAZA" – Manipulation on Eight Levels](https://www.misgavins.org/en/michael-film-naza/) (2026-09-17)
- The Times of Israel, Sarit Zehavi: [What 'Naza' really means: The truth about collateral damage](https://blogs.timesofisrael.com/the-truth-about-naza-or-collateral-damage/) (2026-09-17)
- X · Ben Caspit: [X post on NAZA](https://x.com/BenCaspit/status/2100668281833009328) (2026-09-17)
- Israel Hayom, Dr. Michael Oren: [דעה | לא בבכי, בלחימה קשוחה: כך להגיב לסרט השקרים "נז"א"](https://www.israelhayom.co.il/news/geopolitics/article/21450982) (2026-09-18)
- Makor Rishon, Elchanan Shpeizer: [מג'נין ג'נין ועד נז"א: 80 אחוזים מהסרטים כאן לוקחים את אותו צד](https://www.makorrishon.co.il/news/geopolitics/article/371890) (2026-09-18)
- Reformatorisch Dagblad, Jeannette Gabay-Schoonderwoerd: [Waarom bekroonde documentaire NAZA in Israël zelf vooral op afwijzing stuit](https://www.rd.nl/a/waarom-bekroonde-documentaire-naza-in-israel-zelf-vooral-op-afwijzing-stuit) (2026-09-18)
- The Jerusalem Post, David Ben-Basat: [What NAZA leaves out about October 7 and Israel’s war in Gaza](https://www.jpost.com/opinion/article-908910) (2026-09-18)
- Kan News: [ההאשמות בסרט והקצינים שהיו שם ואומרים: "לא היה ולא נברא"](https://www.youtube.com/watch?v=4FsIthx3LXg) (2026-09-19)
- Maariv, Prof. Aryeh Eldad: [סערת "נז"א": אפשר לחוות דעה על סרט גם בלי לצפות בו](https://www.maariv.co.il/news/opinions/article-1368604) (2026-09-19)
- Mena-Watch, Alexander Gruber: [»NAZA«: Wie ein Film Israel in die Nähe der Nazis rückt](https://mena-watch.com/naza-ein-film-rueckt-israel-in-die-naehe-der-nazis/) (2026-09-19)
- JNS, Adam Levick: [The premise of ‘NAZA’ doesn’t hold up](https://www.jns.org/opinion/adam-levick/the-premise-of-naza-doesnt-hold-up) (2026-09-20)
- Ynet / Yedioth Ahronoth, Ben-Dror Yemini: [לוקחים חלק בעלילה](https://www.ynet.co.il/news/article/yokra14904372) (2026-09-21)
- 20il: [NAZA Fact Check: What the Evidence Actually Shows](https://www.20il.co.il/en/naza-documentary-fact-check/) (2026-09-22)
- Commentary, Seth Mandel: [NAZA Is a Jump-the-Shark Moment for Israel’s Critics](https://www.commentary.org/seth-mandel/naza-is-a-jump-the-shark-moment-for-israels-critics/) (2026-09-22)
- The Wall Street Journal, Omer Shem Tov: [Hostages Like Me Were Also 'NAZA'—Collateral Damage](https://www.wsj.com/opinion/hostages-like-me-were-also-nazacollateral-damage-7cfeb4aa) (2026-09-22)
- Mena-Watch, Sarit Zehavi: [Was »NAZA« über Kollateralschäden verschweigt](https://mena-watch.com/was-naza-verschweigt/) (2026-09-23)
- TheWrap, Shlomi Ben-Meir: ['NAZA' Claims About IDF Action in Gaza Deserve a Closer Look | Guest Column](https://www.yahoo.com/news/world/articles/naza-claims-idf-action-gaza-221115687.html) (2026-09-23)
- Haaretz, Prof. Danny Orbach: [עדויות מוטות ומצג שווא: מדוע "נז"א" חוצה את הגבול מעיתונות לתעמולה](https://www.haaretz.co.il/opinions/2026-09-24/ty-article-opinion/.premium/000001a0-d2c1-d4d3-a1b0-f3fbf1a90000) (2026-09-24)
- Walla! News, אלוף במיל' גיורא איילנד (Maj. Gen. (res.) Giora Eiland): [הסרט "נז"א" במבחן המציאות: האם צה"ל חרג מהדין?](https://www.walla.co.il/news/opinions/383955224) (2026-09-24)
- Il Foglio, Giulio Meotti: [Anatomia della perfetta operazione “Naza”. La zona di interesse di Israele](https://www.ilfoglio.it/gli-inserti-del-foglio-weekend/2026/09/26/news/anatomia-della-perfetta-operazione-naza-la-zona-di-interesse-di-israele--408754) (2026-09-26)
- Israel National News, Dr. Alex Grobman: [NAZA's allegation of a system: What the evidence really shows](https://www.israelnationalnews.com/news/433694) (2026-09-27)
- The Times of Israel, Emanuel Fabian and Nurit Yohanan: [NAZA’s claims about IDF conduct in Gaza are grave. So are the film’s journalistic flaws](https://www.timesofisrael.com/nazas-claims-about-idf-conduct-in-gaza-are-grave-so-are-the-films-journalistic-flaws/) (2026-09-27)
- Yair Miron personal site: [אחת עשרה מניפולציות בסרט "נז"א"](https://www.matirasurim.com/media/yair-miron-naza-manipulations) (2026-09-27)
- Zman Yisrael, Emanuel Fabian, Nurit Yohanan: [הטענות של הסרט "נז"א" נגד צה"ל חמורות. כך גם הכשלים העיתונאיים שלו](https://www.zman.co.il/727990/) (2026-09-27)
- taz, Tim Caspar Boehme: [Debatte um Dokumentarfilm „Naza“: Warum tut ihr das?](https://taz.de/Debatte-um-Dokumentarfilm-Naza/!6211185/) (2026-09-27)
- JNS, Amelie Botbol: ['NAZA' documentary fails to show IDF efforts to prevent civilian casualties, former officer says](https://www.jns.org/news/israel-news/naza-documentary-fails-to-show-idf-efforts-to-prevent-civilian-casualties-former-officer-says) (2026-09-28)
- The Jerusalem Post, Yisrael Medad: [NAZA and the rising campaign to demonize Israel](https://www.jpost.com/opinion/article-909943) (2026-09-28)
- The Jerusalem Post, Ari Tatarka: ['NAZA' film at Venice Festival exposes the IDF's struggle to defend its story](https://www.jpost.com/opinion/article-909844) (2026-09-28)
- X · Yoseph Haddad: [No such 500 event exists](https://x.com/YosephHaddad/status/2104550530638889184) (2026-09-28)
- Enfoque Judío, Elías Cohen: [NAZA: ¿Dónde termina el documental y comienza el libelo?](https://enfoquejudio.es/naza-donde-termina-el-documental-y-comienza-el-libelo/) (2026-09-30)
- Israel Hayom, Yishai Kitchels: [צפיתי ב80 הדקות של "נז"א" כדי שלא תצטרכו: כך נראית אג'נדה חד צדדית ומקוממת](https://www.israelhayom.co.il/culture/films/article/21518084) (2026-09-30)
- Jüdische Allgemeine, Sophie Albers Ben Chamo: [»NAZA«: Die Banalität der Propaganda](https://www.juedische-allgemeine.de/kultur/die-banalitaet-der-propaganda/) (2026-09-30)
- The Atlantic, Gal Beckerman: [The Missed Opportunity of NAZA](https://www.theatlantic.com/culture/2026/09/missed-opportunity-documentary-movie-naza/688832/) (2026-09-30)
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- IDF Spokesperson's Unit: [IDF Response to the Film "NAZA" (10-page English document)](https://cdn-media.web-view.net/i/ww3xwccasc/________________________16.pdf) (2026-10-01)
- Il Foglio, Mariarosa Mancuso: [Fonti anonime ma gli spettatori applaudono sulla fiducia. “Naza” continua](https://www.ilfoglio.it/cinema/2026/10/01/news/fonti-anonime-ma-gli-spettatori-applaudono-sulla-fiducia-naza-continua--409226) (2026-10-01)
- Israel Hayom, Lilach Shoval: [סעיף אחר סעיף: צה"ל מפרק את טענות הסרט "נז"א"](https://www.israelhayom.co.il/news/defense/article/21528303) (2026-10-01)
- JNS, Fiamma Nirenstein: [‘NAZA’ turns anti-Israel propaganda into box-office success](https://www.jns.org/opinion/column/fiamma-nirenstein/naza-turns-anti-israel-propaganda-into-box-office-success) (2026-10-01)
- Jewish Telegraphic Agency, Deborah Danan: [In its first detailed response to ‘NAZA’ documentary, IDF claims ‘fundamental errors’](https://www.jta.org/2026/10/01/israel/in-its-first-detailed-response-to-naza-documentary-idf-claims-fundamental-errors) (2026-10-01)
- Neue Zürcher Zeitung, Richard C. Schneider: [Führt Israel den Krieg wie ein Videospiel? Was der Film «Naza» zeigt und was nicht](https://www.nzz.ch/feuilleton/kino-fernsehen-streaming/fuehrt-israel-den-krieg-wie-ein-videospiel-was-naza-zeigt-und-was-nicht-ld.10026098) (2026-10-01)
- Perlentaucher, Perlentaucher Efeu editors: [Efeu - Die Kulturrundschau vom 01.10.2026: NAZA. Peyman Engel und Menasse.](https://www.perlentaucher.de/efeu/2026-10-01.html) (2026-10-01)
- The Algemeiner: [‘Misrepresented and Manipulative Depiction of Reality’: IDF Issues Detailed Response to ‘NAZA’ Documentary](https://www.algemeiner.com/2026/10/01/misrepresented-and-manipulative-depiction-of-reality-idf-issues-detailed-response-to-naza-documentary/) (2026-10-01)
- The Times of Israel, Emanuel Fabian: ['Distorted, misleading, and disingenuous': IDF publishes full response to 'NAZA' film](https://www.timesofisrael.com/distorted-misleading-and-disingenuous-idf-publishes-full-response-to-naza-film/) (2026-10-01)
- Washington Examiner, Arie Blitz: [Before you applaud NAZA: A standing ovation is not proof of a war crime](https://www.washingtonexaminer.com/op-eds/4748795/naza-documentary-venice-fact-check/) (2026-10-01)
- Ynet, Elisha Ben Kimon: [כמעט חודש אחרי הסערה, צה"ל מגיב על הסרט נז"א: "תמונה מעוותת ומניפולטיבית"](https://www.ynet.co.il/news/article/sktyztoczg) (2026-10-01)
- Il Foglio, Giuliano Ferrara: [Il documento dell’Idf su Gaza, che smonta il facilismo frivolo e l’ambiguità morale di “Naza”, è un testo di dolorosa serietà](https://www.ilfoglio.it/esteri/2026/10/02/news/il-documento-dellidf-su-gaza-che-smonta-il-facilismo-frivolo-e-lambiguita-morale-di-naza-e-un-testo-di-dolorosa-serieta--409416) (2026-10-02)
- X · Andrew Fox: [The occupancy map in NAZA](https://x.com/Mr_Andrew_Fox/status/2106106004370849906) (2026-10-02)
- il Giornale, Fiamma Nirenstein: [Il pubblico italiano pazzo per “Naza”. E le sue bugie antisemite](https://www.ilgiornale.it/news/guerra/il-pubblico-italiano-pazzo-per-naza-e-le-sue-bugie-antisemite/) (2026-10-02)
- Libero Quotidiano, Giovanni Longoni: [Guardate "Naza". Ma non cadete in trappola](https://www.liberoquotidiano.it/news/esteri/49285630/guardate-naza-ma-non-cadete-in-trappola/) (2026-10-03)
- X · John Spencer: [Worse than Hamas propaganda](https://x.com/SpencerGuard/status/2106840130220699887) (2026-10-04)
- X · Micha Danzig: [Genocidal armies don't count collateral damage](https://x.com/DanzigMD/status/2106853320124244353) (2026-10-04)
- yairmiron.com, Yair Miron: [I Watched NAZA in Full. Here Are Eleven Ways It Misleads Viewers.](https://www.yairmiron.com/media/yair-miron-naza-manipulations-en) (2026-10-04)
- J. The Jewish News of Northern California, Oleg Ivanov and Dr. Mike Harris: [‘NAZA’ viciously misrepresents Israel’s military](https://jweekly.com/2026/10/05/naza-viciously-misrepresents-israels-military/) (2026-10-05)
- Aish.com, Dr. Yvette Alt Miller: [NAZA's Biggest Claims, and Why the IDF Says They're Wrong](https://aish.com/nazas-biggest-claims-and-why-the-idf-says-theyre-wrong/) (2026-10-06)
- Associated Press: [Israeli documentary 'NAZA' opens in the US, reigniting debate over the war in Gaza](https://www.ksat.com/news/politics/2026/10/06/israeli-documentary-naza-opens-in-the-us-reigniting-debate-over-the-war-in-gaza/) (2026-10-06)
- Breitbart: [EXCLUSIVE -- Urban Warfare Expert: Gaza 'Genocide' Libel Is 'Greatest Lie'](https://www.breitbart.com/politics/2026/10/07/exclusive-urban-warfare-expert-john-spencer-gaza-genocide-libel-against-israel-is-greatest-lie-in-modern-history/) (2026-10-07)
- Fox News Digital, Rachel Wolf: ['I am Omer': Former Hamas hostage reflects on surviving 505 harrowing days in captivity](https://www.foxnews.com/media/i-am-omer-former-hamas-hostage-reflects-surviving-505-harrowing-days-captivity) (2026-10-07)
- Il Foglio, Sharon Nizza: [Alla ricerca di qualche verità. Colloquio con il giornalista Raviv Drucker](https://www.ilfoglio.it/esteri/2026/10/07/news/alla-ricerca-di-qualche-verita--409787) (2026-10-07)
- The Times of Israel, Avi Lewis: [The airstrikes we canceled: What NAZA leaves out](https://blogs.timesofisrael.com/i-worked-with-the-real-naza-heres-what-the-film-gets-wrong/) (2026-10-07)
- Agenzia Nova: [Peled: "Rapporto solido tra Israele e Italia ma serve un maggiore sostegno dell'opinione pubblica"](https://www.agenzianova.com/news/peled-rapporto-solido-tra-israele-e-italia-ma-serve-un-maggiore-sostegno-dellopinione-pubblica/) (2026-10-08)
- HonestReporting, Rachel O'Donoghue: [The Real “NAZA”: Edited Quotes, Mystery ICC Cases & Unexplained Gaza Footage](https://honestreporting.com/the-real-naza-edited-quotes-mystery-icc-cases-unexplained-gaza-footage/) (2026-10-08)
- Jewish Journal, Alan Zeitlin: [‘NAZA’ Proves Nada](https://jewishjournal.com/culture/arts/film/392993/naza-proves-nada/) (2026-10-08)
- The Filitti Brief, Gerard Filitti: [Before the Missile Flies: How the United States Picks Targets, Weighs Civilian Harm, and Answers for Mistakes](https://gerardfilitti.substack.com/p/before-the-missile-flies-how-the) (2026-10-08)
- The Jewish Chronicle, Philipp Peyman Engel: [I’ve seen Naza and it’s a nasty piece of propaganda](https://www.thejc.com/opinion/ive-seen-naza-and-its-a-nasty-piece-of-propaganda-umbuoml4) (2026-10-08)
- Walla! News, Baruch Kra: [יש עדויות, אין תחקיר: "נז"א" נכשל עיתונאית, אבל אסור לרדוף את יוצריו](https://www.walla.co.il/news/opinions/383956783) (2026-10-08)
- Il Foglio, Michele Silenzi: [Non serve dimostrare i fatti, basta una realtà ricostruita. Oltre Naza](https://www.ilfoglio.it/societa/2026/10/10/news/non-serve-dimostrare-i-fatti-basta-una-realta-ricostruita-oltre-naza--410157) (2026-10-10)
- Jüdische Allgemeine, Philipp Peyman Engel: [Ich habe »Naza« gesehen, und es ist ein übles Stück Propaganda](https://www.juedische-allgemeine.de/meinung/ich-habe-naza-gesehen-und-es-ist-ein-uebles-stueck-propaganda/) (2026-10-10)
- Tribune Juive, Tribune Juive (unsigned): [NAZA : Le cinéma au service de la propagande](https://www.tribunejuive.info/2026/10/13/naza-le-cinema-au-service-de-la-propagande/) (2026-10-13)
- X · Embassy of Israel in France: [Le film « Naza » présente une réalité déformée, trompeuse et malhonnête.](https://x.com/IsraelenFrance/status/2110019413374026017) (2026-10-13)
- 21 News, Harrison du Bus: [Documentaire NAZA : Tsahal dénonce une « réalité déformée, trompeuse et malhonnête »](https://www.21news.be/documentaire-naza-tsahal-denonce-une-realite-deformee-trompeuse-et-malhonnete/) (2026-10-14)
- X · Andrew Fox: [NAZA proves the IDF did collateral damage estimates](https://x.com/Mr_Andrew_Fox/status/2110291461115613334) (2026-10-14)
- X · Salo Aizenberg: [Collateral damage skewed to fighting-age men](https://x.com/Aizenberg55/status/2110400898870726936) (2026-10-14)
- The Times of Israel Blogs, Dinah Bucholz: [The "NAZA" Saga](https://blogs.timesofisrael.com/the-naza-saga/) (2026-10-15)
- Alliance, Lou Helwaser and 28 signatories (incl. Richard Berry, Michel Boujenah, Élie Chouraqui, Éric Naulleau, Rachel Khan, Avi Pazner, Nathalie Cohen-Beizermann): [Tribune. Une rescapée de la Shoah et vingt-huit personnalités contre le film NAZA](https://www1.alliancefr.com/actualites/tribune-une-rescapee-de-la-shoah-et-vingt-huit-personnalites-contre-le-film-naza-6135461) (2026-10-16)
- X · Salo Aizenberg: [Was Israel Justified in Bombing Hamas Combatants in Their Homes?](https://x.com/Aizenberg55/status/2111855060481081598) (2026-10-18)
- The Jewish Chronicle, John Nathan: [NAZA review: ‘This is what happens when artists and activists do the work of objective journalists’ ★★](https://www.thejc.com/life/film/naza-review-this-is-what-happens-when-artists-and-activists-do-the-work-of-objective-journalists-gnops8j4) (2026-10-19)
- X · Salo Aizenberg: [NAZA: A Propaganda Film Masquerading as an Investigation of the Gaza War](https://x.com/Aizenberg55/status/2112236420006031570) (2026-10-19)
- Aurora, Leonardo Rubinsky: [Graves acusaciones sin pruebas: película NAZA](https://www.aurora-israel.co.il/naza-acusaciones-israel-pruebas-verificables/) (2026-10-25)
- Report24, Florian Machl: [Film NAZA: Hasspropaganda gegen Israel auf Basis anonymer, nicht überprüfbarer Aussagen](https://report24.news/film-naza-hasspropaganda-gegen-israel-auf-basis-anonymer-nicht-ueberpruefbarer-aussagen/) (2026-10-28)
- The Wall Street Journal, Kyle Smith: ['NAZA' Has Nada on Israel](https://www.wsj.com/opinion/free-expression/naza-has-nada-on-israel-33203a03) (2026-11-02)
